पटना: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 1972) कई ऐतिहासिक घटनाओं के कारण विशेष रूप से याद किया जाता है। इस चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ जब एक भी महिला उम्मीदवार विधानसभा नहीं पहुंच सकीं। कुल 45 महिलाओं ने विभिन्न दलों से चुनाव लड़ा, लेकिन सभी को हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 1952, 1957, 1962, 1967 और 1969 के चुनावों में महिलाओं को सफलता मिलती रही थी।
महिलाओं की भागीदारी शून्य
1972 का चुनाव महिलाओं के लिए एक झटका साबित हुआ। विभिन्न दलों ने महिला प्रत्याशियों को मौका दिया, लेकिन जनता का समर्थन नहीं मिल पाया। इसके चलते पहली बार बिहार विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो गया।
कांग्रेस की सत्ता में वापसी
लगातार दो चुनावों (1967 और 1969) में बहुमत से चूकने के बाद कांग्रेस को इस बार स्पष्ट जनादेश मिला। कांग्रेस (इंडियन नेशनल कांग्रेस) ने 259 सीटों पर चुनाव लड़ा और 167 सीटें जीतने में सफल रही। इस जीत के साथ केदार पांडेय बिहार के मुख्यमंत्री बने।
तीन चुनावों में सरकार बनाने की जद्दोजहद
बिहार की जनता को पांच साल में तीसरी बार विधानसभा चुनाव का सामना करना पड़ा। 1967 और 1969 के चुनावों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था, जिसके कारण राजनीतिक अस्थिरता बनी रही। लेकिन 1972 में कांग्रेस ने अपनी मजबूत पकड़ बनाई और सरकार बनाने में सफल रही।
अन्य दलों का प्रदर्शन
• भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI): 55 सीटों पर चुनाव लड़ा और 35 पर जीत हासिल की।
• मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM): 51 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन सभी हार गए।
• संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी/सोशलिस्ट पार्टी: 256 सीटों पर लड़ी और 33 सीटों पर जीत दर्ज की।
• इंडियन नेशनल कांग्रेस (O): 30 सीटों पर जीत हासिल की।
• भारतीय जनसंघ: 270 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 25 पर जीत मिली।
• निर्दलीय उम्मीदवार: 17 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
• अन्य दल: मात्र 11 उम्मीदवार जीतने में सफल रहे।
पारू से विधायक ने बनाए रिकॉर्ड
1972 के चुनाव में कुछ सीटों पर रोचक मुकाबले देखने को मिले। पारू विधानसभा सीट पर कांग्रेस के बीरेंद्र कुमार सिंह ने 91% वोट पाकर रिकॉर्ड जीत दर्ज की।
इसके अलावा, तीन अन्य सीटों पर भी केवल दो-दो उम्मीदवार मैदान में थे:
• ताजपुर: संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के कर्पूरी ठाकुर विजयी हुए।
• गोरियाकोठी: कांग्रेस के महामाया प्रसाद ने जीत दर्ज की।
• आलमनगर: कांग्रेस के विद्याकर कवि चुनाव जीते।
1972 का बिहार विधानसभा चुनाव कांग्रेस की सत्ता में वापसी और महिलाओं की असफलता के लिए इतिहास में दर्ज हुआ। यह चुनाव बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव लेकर आया, जहां कांग्रेस ने फिर से अपना वर्चस्व स्थापित किया, लेकिन महिलाओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नए सवाल खड़े कर दिए।






















