बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) से ठीक पहले पटना में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की अहम बैठक ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और देशभर से आए सीडब्ल्यूसी सदस्य मौजूद रहे। बिहार की धरती पर हुई इस बैठक को कांग्रेस के चुनावी तेवर और महागठबंधन की दिशा तय करने वाली कवायद माना जा रहा है।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने आज़ादी की लड़ाई में सबसे बड़ी भूमिका निभाई, वही आज भी जनता की आवाज़ उठा रही है। बघेल ने बेरोजगारी, किसानों की हालत और छोटे व्यापारियों पर पड़े जीएसटी के असर को केंद्र सरकार की सबसे बड़ी नाकामियां बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद की पीठ थपथपाने में व्यस्त हैं जबकि आम जनता आर्थिक और सामाजिक दबाव में जूझ रही है।
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विदेश नीति पर भी बघेल ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। पाकिस्तान के साथ सीजफायर और नेपाल में हुई हिंसक झड़पों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का कूटनीतिक प्रभाव घट रहा है और पड़ोसी देशों से रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं। बघेल का यह बयान विपक्षी दलों की उस रणनीति को मजबूत करता है जिसमें विदेश नीति को भी चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।
जातीय जनगणना पर बोलते हुए बघेल ने साफ कहा कि केंद्र सरकार ने यह कदम राहुल गांधी के दबाव में उठाया। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाकर आगामी विधानसभा चुनाव की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी।
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बिहार की राजनीति पर अपनी राय रखते हुए बघेल ने यह स्पष्ट किया कि पटना की बैठक महागठबंधन का चेहरा तय करने के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस को संगठित और मजबूत बनाने के लिए आयोजित हुई थी। उन्होंने खड़गे के बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि नीतीश कुमार भाजपा के लिए केवल इस्तेमाल की वस्तु हैं और उन्हें किसी भी वक्त किनारे किया जा सकता है।






















