बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) में महागठबंधन की करारी हार के बाद सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख और ‘सोन ऑफ मल्लाह’ के नाम से चर्चित मुकेश सहनी ने एनडीए की ऐतिहासिक जीत पर तीखा तंज कसकर राजनीतिक बहस को और गर्मा दिया है। सहनी ने हार को स्वीकार जरूर किया, लेकिन साथ ही उन्होंने चुनावी नतीजों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि एनडीए को असली जनादेश नहीं मिला है, बल्कि जीत धनबल के सहारे हासिल की गई है।
मुकेश सहनी के मुताबिक, बिहार में जिस तरह पैसा चुनाव के दौरान बहाया गया, वह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की नींव जनता के फैसले पर टिकी होती है, लेकिन अगर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे का इस्तेमाल किया जाए तो यह चुनावी प्रणाली को कमजोर करता है। सहनी ने स्पष्ट कहा कि महागठबंधन को हार मिली, एनडीए जीता, लेकिन इसे जनादेश कहना गलत होगा क्योंकि यह जीत लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि बाजारवाद का असर लगती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई जारी रहेगी और उनकी पार्टी मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
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इसके साथ ही सहनी ने एनडीए को उनकी ही वादों की याद दिलाते हुए कहा कि अब समय है कि सरकार ‘जीविका दीदी’ योजना पर किए गए वादों को पूरा करे। चुनाव प्रचार के दौरान इस योजना को लेकर बड़े दावे किए गए थे, और अब जनता बारीकी से देख रही है कि उन वादों को हकीकत में बदलने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।
लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रही कथित फूट पर भी सहनी ने टिप्पणी की और इसे पूरी तरह ‘पारिवारिक मामला’ बताया। उन्होंने कहा कि हार के बाद किसी एक व्यक्ति पर ठीकरा फोड़ना परंपरा बन चुकी है, लेकिन यह तरीका सही नहीं है। सहनी का मानना है कि राजनीति में हार-जीत के बाद सबसे जरूरी होता है आत्ममंथन करना और गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ना, न कि जिम्मेदारी एक परिवार या किसी एक चेहरे पर डाल देना।






















