बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान आज शुरू हो गया है। प्रदेश के 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता 1302 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। पहले चरण में जहां 65 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था, वहीं दूसरे चरण में भी उत्साह चरम पर है। बिहार के सीमांचल, मिथिलांचल, चंपारण और शाहाबाद-मगध बेल्ट की ये सीटें राज्य की सत्ता का समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाने जा रही हैं।
इस चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के आधा दर्जन से अधिक मंत्री मैदान में हैं, जिनकी साख पर जनता की मुहर लगेगी। वहीं इंडिया गठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल) के लिए यह चरण निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि सीमांचल क्षेत्र की मुस्लिम आबादी इस गठबंधन की उम्मीदों की धुरी मानी जा रही है। अररिया, किशनगंज, कटिहार, मधुबनी, सुपौल, और चंपारण जैसे जिलों में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, दूसरे चरण में 45,399 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 40,073 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। महिला मतदाताओं की संख्या इस बार 1.75 करोड़ के पार पहुंच गई है। नवादा की हिसुआ सीट पर सबसे ज्यादा 3.67 लाख मतदाता हैं, जबकि लौरिया, रक्सौल, बनमखी, सुगौली, त्रिवेणीगंज और चनपटिया सीटों पर प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक (22-22) है।
इस चरण में कई बड़े चेहरे मैदान में हैं – भाजपा की रेणु देवी (बेतिया), जेडीयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव (सुपौल), लेशी सिंह (धमदाहा) और आरजेडी के चाणक्य प्रकाश रंजन (बेलहर)। पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद भी कटिहार से लगातार पांचवीं बार किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं एनडीए सहयोगी दल HAM और RLM के लिए भी यह चरण ‘अग्निपरीक्षा’ साबित हो सकता है। हम की छह और आरएलएम की सभी सीटों पर आज ही मतदान हो रहा है।
सीमांचल क्षेत्र का यह चरण राजनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि यहीं एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है। एनडीए ‘विकास और स्थिरता’ के मुद्दे पर मैदान में है, जबकि विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था को चुनावी एजेंडा बना रहा है। चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।






















