बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) के पहले चरण की वोटिंग ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया है। 18 जिलों की 121 सीटों पर करीब 64.7 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है, जो 2020 के मुकाबले लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। इतना बड़ा उछाल सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि जनता के मूड का मजबूत संदेश भी है। अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह बढ़ा हुआ मतदान सत्ता की वापसी का संकेत है या फिर बदलाव की आहट का सबूत? यही वजह है कि बिहार की बंपर वोटिंग ने एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही गठबंधनों में नई ऊर्जा और चिंता दोनों पैदा कर दी है।
जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा का मानना है कि यह उत्साह “सत्ता की वापसी” का संकेत है। उन्होंने कहा कि जब भी बिहार में मतदान बढ़ा है, सत्ता में मौजूद सरकार की वापसी हुई है। “2005 से 2010 और 2010 से 2015 तक हर बार जब ज्यादा वोट पड़े, तब जनता ने स्थिरता को चुना। इस बार लोग नीतीश कुमार के सुशासन, सुरक्षा और विकास के लिए निकले हैं। नतीजे इससे भी बेहतर होंगे।”
वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एनडीए के प्रदर्शन पर भरोसा जताते हुए कहा कि “डबल इंजन सरकार पर जनता का विश्वास बढ़ा है। जिस तरह से मतदान हुआ है, हमें यकीन है कि 121 में से 100 सीटें हम आसानी से जीतेंगे। लोग विकास के नाम पर वोट कर रहे हैं, न कि किसी भ्रम के आधार पर।”
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हालांकि, महागठबंधन इस बंपर वोटिंग को “बदलाव की लहर” बता रहा है। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि “एनडीए बेवजह खुश हो रहा है, वोटिंग प्रतिशत बढ़ा नहीं है, पैटर्न वही है। इस बार बिहार में परिवर्तन तय है, युवा महागठबंधन के साथ हैं।”
इस बीच, बिहार के चुनावी मैदान में तीसरा विकल्प बनकर उभर रही जन सुराज की आवाज़ भी तेज़ हो गई है। प्रशांत किशोर ने कहा, “यह आज़ादी के बाद से सबसे अधिक मतदान है और यह जनता की बेचैनी का संकेत है। बिहार अब विकल्प चाहता है। जन सुराज की वजह से लोगों को एक नया रास्ता मिला है। प्रवासी मजदूरों ने इसमें बड़ा रोल निभाया है, जो इस बार एक्स-फैक्टर साबित होंगे। 14 नवंबर को बिहार इतिहास लिखेगा।”
सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही इस बंपर वोटिंग को अपने पक्ष में बता रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इस बार बिहार की जनता ने अपनी ताकत पूरी तरह से दिखाई है। अब यह ताकत किसे सत्ता के शिखर तक पहुंचाती है, यह आने वाले दिनों में तय होगा।
इतिहास गवाह है कि बिहार में जब-जब वोटिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, तब-तब सियासत के समीकरण उलट गए हैं। 2025 का यह चुनाव भी शायद कुछ वैसा ही संकेत दे रहा है — एक ऐसा जनादेश, जो या तो सत्ता को और मजबूत करेगा या पूरी तस्वीर बदल देगा।






















