Sasaram Vidhan Sabha 2025: रोहतास जिले की सासाराम विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 208) बिहार की उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां राजनीति हर चुनाव में नया समीकरण गढ़ती है। अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित यह सीट न सिर्फ सासाराम लोकसभा क्षेत्र का अहम हिस्सा है, बल्कि राज्य की राजनीति में जातीय और दलगत फेरबदल की एक सजीव मिसाल भी है।
चुनावी इतिहास
1957 में गठन के बाद से इस सीट पर अब तक 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें समाजवादी विचारधारा से जुड़े दलों ने 10 बार, भाजपा ने 5 बार और कांग्रेस ने सिर्फ 2 बार जीत हासिल की है। यह इतिहास इस बात का संकेत है कि सासाराम की जनता हमेशा वैचारिक बदलावों को खुले मन से स्वीकारती रही है।
पिछले दो दशकों में सासाराम की सियासत भाजपा और राजद के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 1990 से 2015 के बीच भाजपा के दिग्गज नेता जवाहर प्रसाद ने पांच बार इस सीट पर कब्जा जमाया। वहीं, राजद के अशोक कुमार ने 2000 और 2015 में जीत दर्ज कर भाजपा के किले में सेंध लगाई। लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गया। इस बार राजद के राजेश कुमार गुप्ता ने जदयू के उम्मीदवार अशोक कुमार को 26,423 वोटों के भारी अंतर से हराकर इस सीट पर राजद का वर्चस्व स्थापित कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि 2015 में राजद से विधायक बने अशोक कुमार बाद में जदयू में शामिल हो गए थे। यह दल-बदल न केवल उनके राजनीतिक करियर में मोड़ लेकर आया बल्कि सासाराम के चुनावी गणित को भी नए रूप में ढाल गया। 2020 में भाजपा ने यह सीट अपने सहयोगी जदयू को सौंप दी, लेकिन नतीजा उम्मीद के विपरीत आया—राजद ने मजबूती से वापसी की।
जातीय समीकरण
सासाराम की राजनीति केवल दलों की नहीं बल्कि जातीय समीकरणों की भी कहानी कहती है। इस क्षेत्र में कुशवाहा समुदाय की पकड़ लंबे समय तक रही है। 1980 से लेकर 2015 तक यहां लगातार इसी समुदाय के नेता विजेता और उपविजेता रहे। हालांकि यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, फिर भी जातिगत गठजोड़ और वोटिंग पैटर्न चुनावी नतीजों को गहराई से प्रभावित करते हैं। अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता सासाराम विधानसभा में लगभग 17.55 प्रतिशत हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 15.20 प्रतिशत है। ये दोनों समुदाय हर चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाते हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी इनका झुकाव तय करेगा कि सासाराम की गद्दी पर कौन बैठेगा — राजद, भाजपा या फिर कोई नया चेहरा।






















