बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) के अंतिम चरण के बाद जैसे-जैसे मतगणना का दिन नज़दीक आ रहा है, सियासी बयानबाजी भी चरम पर पहुंच गई है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव के हालिया बयान पर एनडीए नेताओं ने तीखे पलटवार किए हैं। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि तेजस्वी यादव और उनके साथियों की हार तय है। उन्होंने यहां तक कहा कि राघोपुर सीट से भी तेजस्वी यादव हार रहे हैं। उनके मुताबिक, “तेजस्वी यादव अब से ही हार का बहाना ढूंढने लगे हैं, ताकि जब नतीजे आएं तो वे हार की जिम्मेदारी किसी और पर डाल सकें।” राजीव रंजन ने कहा कि बिहार की जनता ने एनडीए पर भरोसा किया है क्योंकि उन्होंने राज्य में वास्तविक विकास देखा है, सिर्फ नारों का शोर नहीं।
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इसी क्रम में भाजपा नेता और सांसद राजीव प्रताप रूडी ने एग्जिट पोल्स का हवाला देते हुए दावा किया कि बिहार की जनता ने विकास और स्थिरता के नाम पर वोट किया है। रूडी ने कहा, “17 में से 13 समीक्षकों ने भाजपा और एनडीए की सरकार को बहुमत दिया है। यह इस बात का संकेत है कि लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। यह चुनाव असल में मोदी बनाम राहुल-तेजस्वी-नीतीश नहीं, बल्कि विकास बनाम भ्रम की लड़ाई था।”

रूडी ने आगे कहा कि बिहार का जातीय समीकरण भी इस बार महागठबंधन के खिलाफ गया है। “राजद और इंडी गठबंधन का जातीय गणित इस बार जनता के गणित के सामने टिक नहीं पाया है,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, “तेजस्वी यादव की बेचैनी इस बात का सबूत है कि उन्हें अब हार की आहट साफ सुनाई दे रही है।”

तेजस्वी यादव के बयान पर भाजपा के एक और तेजतर्रार नेता अजय आलोक ने भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव अब ‘डिल्यूज़्न’ (भ्रम) की स्थिति में हैं। उन्हें लगता है कि वे 99 सीटें जीत चुके हैं, खुद को मुख्यमंत्री बना चुके हैं और सरकार भी गठित कर चुके हैं। लेकिन हकीकत 18 नवंबर को साफ हो जाएगी।” अजय आलोक ने व्यंग्य करते हुए कहा कि तेजस्वी को उस दिन ‘शपथ’ लेनी चाहिए—न कि मुख्यमंत्री पद की, बल्कि इस बात की कि वे अपनी पुरानी गलतियों, भ्रष्टाचार और अवैध कमाई से तौबा करेंगे।






















