बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। एक ओर जहां सभी राजनीतिक दल सीट बंटवारे और गठबंधन समीकरणों में उलझे हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बिहार में निर्वाचन आयोग की दो दिवसीय बैठक का आज दूसरा दिन है, जो रविवार को भी लगातार जारी रहेगी। बैठक के दौरान, चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी इंफोर्समेंट एजेंसियों के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ज्ञानेश कुमार, बिहार पुलिस और केंद्रीय बल के नोडल अधिकारियों के साथ भी समीक्षा बैठक करेंगे। इसके अलावा, मुख्य सचिव, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक होगी।
चुनाव आयोग की टीम का शेड्यूल
- सुबह 9:30 से 11 बजे तक: चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी इंफोर्समेंट एजेंसियों के साथ बैठक.
- 11:30 से 12 बजे तक: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार पुलिस और केंद्रीय बल के नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक.
- दोपहर 12 से 1 बजे तक: मुख्य सचिव, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक.
- 1 से 2 बजे तक: लंच ब्रेक.
- दोपहर 2 बजे: मुख्य निर्वाचन आयुक्त की प्रेसवार्ता
इससे पहले शनिवार को आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी। इस बैठक में बीजेपी, कांग्रेस, आरजेडी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास), राजद, आप, बसपा, सीपीआई, सीपीआई (एम), और सीपीआई (एम-एल) (लिबरेशन) सहित कई दलों के नेता मौजूद रहे। इन दलों ने आयोग को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सुझाव दिए और मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए आयोग के प्रयासों की सराहना की।
राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया कि मतदान की तारीखें छठ पर्व के तुरंत बाद रखी जाएं ताकि अधिक से अधिक मतदाता मतदान में भाग ले सकें। इसके साथ ही सभी दलों ने सुझाव दिया कि बिहार में चुनाव यथासंभव कम चरणों में पूरे किए जाएं, ताकि प्रशासनिक बोझ कम हो और नतीजे जल्द सामने आ सकें। राजनीतिक दलों ने मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या 1200 तक सीमित करने, ईवीएम मतगणना से पहले डाक मतपत्रों की गिनती सुनिश्चित करने और प्रत्येक एजेंट को मतदान केंद्र छोड़ने से पहले फॉर्म 17सी दिए जाने की पहल की भी प्रशंसा की।
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्षता के साथ काम करना होगा। आयोग ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फर्जी खबरों की निगरानी को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भ्रामक या गलत सूचना सामने आती है तो तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।






















