पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के एक एक्स पोस्ट ने बिहार की राजनीति में अचानक हलचल तेज कर दी है। वैश्विक स्तर पर चर्चित ‘एपस्टीन फाइल’ (Epstein File Bihar) का संदर्भ लेते हुए उन्होंने दावा किया कि ऐसी ही एक फाइल बिहार में भी घूम रही है। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने न सिर्फ सत्ताधारी और विपक्षी खेमों की बेचैनी बढ़ा दी, बल्कि सत्ता–समाज–मीडिया की त्रिकोणीय चुप्पी पर भी सीधे सवाल खड़े कर दिए। उनके शब्दों में चेतावनी थी कि ‘ज़्यादा फड़फड़ाइए मत’, यानी आरोपों की परतें खुलीं तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

पप्पू यादव ने अपने पोस्ट में कथित तौर पर तरणताल में जलक्रीड़ा से लेकर ‘आसाराम जैसे शौक’ वाले नेताओं तक का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि यह मामला केवल अफवाह या सोशल मीडिया की सनसनी नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोगों से जुड़ा एक ‘कच्चा चिट्ठा’ हो सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में सत्ता के दुरुपयोग, नैतिकता और जवाबदेही पर बहस तेज है। उनके तंज का निशाना सिर्फ राजनीतिक वर्ग नहीं रहा; उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने एक पुराने कथित स्टिंग ऑपरेशन की याद दिलाई, जिसमें एक अखबार द्वारा हॉस्टल से लड़कियों की सप्लाई को लेकर खुलासा करने का दावा किया गया था। पप्पू यादव का सवाल था कि तब ‘सांप सूंघ गया था क्या?’ यानी उस वक्त जांच और कार्रवाई की मांग क्यों ठंडी पड़ गई। यह टिप्पणी दरअसल संस्थागत खामोशी की ओर इशारा करती है, जहां आरोपों की गंभीरता के बावजूद सिस्टम की प्रतिक्रिया संदिग्ध रही।






















