बिहार विधानसभा में इथेनॉल फैक्ट्रियों (Bihar Ethanol Kota) के उत्पादन और केंद्र सरकार द्वारा तय खरीद कोटे को लेकर गरमागरम बहस ने राज्य की औद्योगिक नीति और रोजगार के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सदन में उठे सवालों ने यह साफ कर दिया कि मामला केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि किसानों की आय, युवाओं की नौकरियों और राज्य की औद्योगिक साख से भी जुड़ा है।
विधायक श्याम रजक ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब बिहार की डेडिकेटेड इथेनॉल इकाइयां अधिक उत्पादन करने में सक्षम हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा तय खरीद सीमा बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर क्या ठोस पहल की गई है। उनका तर्क था कि अगर उत्पादन क्षमता और खरीद कोटे के बीच अंतर बना रहा, तो इसका सीधा असर फैक्ट्रियों के संचालन और रोजगार पर पड़ेगा।
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इस पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि फैक्ट्रियों के स्थायी रूप से बंद होने की खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने सदन को बताया कि भारत सरकार के साथ बिहार का 35 लाख 28 हजार करोड़ लीटर इथेनॉल खरीद का एमओयू हुआ है। राज्य में समर्पित इकाइयों द्वारा लगभग 1602 किलोलीटर प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है, जबकि केंद्र ने 1060 किलोलीटर प्रतिदिन की खरीद सीमा तय की है। यही अंतर वर्तमान संकट की जड़ है।
मंत्री ने कहा कि जब तक केंद्र की ओर से कोई निर्धारित कोटा नहीं था, तब तक पूरा उत्पादन खरीदा जा रहा था। लेकिन कोटा तय होने के बाद केवल निर्धारित मात्रा तक ही खरीद हो रही है। इससे अतिरिक्त उत्पादन का दबाव फैक्ट्रियों पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैक्ट्री कुछ दिनों के लिए तकनीकी या परिचालन कारणों से बंद रही थी, लेकिन इसे स्थायी बंदी के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों से परे है।
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सदन में इस मुद्दे पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने भी चिंता जताई। राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े विधायकों ने कहा कि यदि उत्पादन में कटौती होती है तो इसका सीधा असर गन्ना किसानों और स्थानीय श्रमिकों पर पड़ेगा। बिहार में इथेनॉल उद्योग को कृषि और उद्योग के बीच सेतु के रूप में देखा जा रहा है, ऐसे में कोटे की सीमा विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।
सरकार की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि केंद्र से इथेनॉल खरीद कोटा बढ़ाने के लिए औपचारिक अनुरोध किया गया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही दिल्ली जाकर इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत करेंगे। राज्य सरकार का दावा है कि समाधान निकलने पर न केवल उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग होगा, बल्कि रोजगार और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।






















