बिहार की सियासत (Bihar JDU Conflict) के गलियारों में इन दिनों एक नई हलचल दिखाई दे रही है। जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को लेकर पार्टी के अंदर ही नाराज़गी और भावात्मक बयानबाज़ी खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के दिग्गज और बेबाक छवि वाले नेता शिवानंद तिवारी ने मीडिया के सामने जिस तरह अपनी बात रखी, उसने राजनीति के तापमान को और बढ़ा दिया है। तिवारी का आरोप है कि केसी त्यागी को योजनाबद्ध तरीके से सत्ता और संगठन, दोनों से ही दूर किया जा रहा है, जबकि नीतीश कुमार और केसी त्यागी का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि दशकों पुराना व्यक्तिगत रिश्ता भी रहा है।
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शिवानंद तिवारी ने पुराने दिनों का ज़िक्र करते हुए कहा कि केसी त्यागी कभी नीतीश कुमार की राजनीतिक आवाज़ हुआ करते थे। पत्रकारों को जब भी किसी बात की पुष्टि चाहिए होती थी, तो वे सीधे केसी त्यागी से संपर्क करते थे। उनकी शख्सियत, शेरो-शायरी और किस्सागोई ने उन्हें संसद के सेंट्रल हॉल में एक अलग पहचान दी हुई थी, जहाँ वे कभी अकेले नहीं दिखाई देते थे। तिवारी का कहना है कि “केसी त्यागी नीतीश जी के आशिक़ हैं। लेकिन यह एकतरफा मोहब्बत की तरह है।” यह बयान जितना भावनात्मक था, उतना ही राजनीति के अंदर की चुप्पी को भी उजागर करता नजर आया।
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तिवारी ने आगे कहा कि एक समय ऐसा भी था जब नीतीश कुमार की राष्ट्रीय छवि प्रधानमंत्री पद तक के लिए प्रोजेक्ट की जा रही थी। उस दौर में केसी त्यागी ने नीतीश की तारीफ में कहा था कि “जैसे हवा को कोई मुट्ठी में बंद नहीं कर सकता, जैसे फूलों की सुगंध को कोई फैलने से नहीं रोक सकता, वैसे ही नीतीश कुमार के सुशासन और विचारों की गूंज को बिहार की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।” यह बयान उस दौर में काफी चर्चित हुआ था। तिवारी ने इस संदर्भ को याद दिलाते हुए भावनात्मकता के साथ राजनीतिक बदलावों को भी रेखांकित किया।
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हालांकि पूरा मामला तब और गर्म हो गया जब त्यागी ने हाल ही में नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की बात का ज़िक्र किया। शिवानंद तिवारी ने सवाल उठाया कि केसी त्यागी ने आज के समय में भारत रत्न वाली चर्चा क्यों की? क्या यह व्यंग्य था या वास्तविक दावा? यह सवाल इसलिए बड़ा हो गया क्योंकि पार्टी के भीतर केसी त्यागी की उपेक्षा को लेकर हो रही चर्चा इसे एक अलग राजनीतिक संदर्भ में जोड़ रही है। शिवानंद तिवारी ने साफ कहा कि केसी त्यागी को जिस तरह ‘दरकिनार’ किया जा रहा है, वह उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।






















