बिहार में फर्जी और बिना डिग्री वाले डॉक्टरों (Bihar Jhoolachhap Doctor) पर सख्ती को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में बिहार विधान परिषद में यह मुद्दा उस समय जोरदार तरीके से उठा जब परिषद सदस्य और पेशे से डॉक्टर राज्यवर्धन सिंह आजाद ने स्वास्थ्य विभाग से सीधा सवाल किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर एक झोलाछाप व्यक्ति यूट्यूब देखकर मरीज का ऑपरेशन करता दिखाई दे रहा है। इस घटना ने न सिर्फ आम लोगों को चौंकाया, बल्कि राज्य में चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए।
परिषद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने स्पष्ट किया कि राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों को किसी भी प्रकार की कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिना मान्यता प्राप्त डिग्री के कोई भी व्यक्ति न तो दवा लिख सकता है, न इंजेक्शन दे सकता है और न ही किसी प्रकार का ऑपरेशन कर सकता है। ऐसा करना सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई तय है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग खुद को ‘चिकित्सा परामर्शी’ बताकर काम करते हैं, लेकिन उनकी भूमिका सिर्फ मरीज को उचित अस्पताल या योग्य डॉक्टर के पास भेजने तक सीमित हो सकती है। वे किसी भी तरह का चिकित्सीय हस्तक्षेप नहीं कर सकते। यदि कोई व्यक्ति इस सीमा को पार करता है, तो वह आपराधिक दायरे में आएगा। सरकार के मुताबिक बिहार में पहले से ही ऐसे मामलों के खिलाफ कड़े प्रावधान मौजूद हैं और जिलास्तर पर प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों, खासकर दिल्ली जैसे महानगरों में भी फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कड़े नियम लागू हैं और बिहार में भी कानून उतना ही सख्त है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


















