बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में जमीन विवाद (Bihar Land Mafia) लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहे हैं, लेकिन अब राज्य सरकार ने भूमाफिया के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का संकेत दिया है। डिप्टी सीएम सह भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधान परिषद में स्पष्ट घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के हर अंचल में कम से कम चार भूमाफिया की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इस बयान के बाद जमीन कारोबार से जुड़े विवादित नेटवर्क में हलचल तेज हो गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है।
राज्य सरकार का यह कदम सिर्फ कानून-व्यवस्था सुधार का प्रयास नहीं बल्कि सामाजिक स्थिरता से जुड़ा बड़ा निर्णय माना जा रहा है, क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि बिहार में होने वाली आधे से अधिक हत्याएं जमीन विवाद से जुड़ी होती हैं। ऐसे में भूमाफिया पर कार्रवाई का सीधा असर अपराध दर पर पड़ सकता है। मंत्री ने संकेत दिया कि यह अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भूमाफिया की संपत्तियों की जांच भी की जाएगी और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मंत्री विजय सिन्हा ने पहले ही पदभार संभालते समय बालू माफिया, दारू माफिया और जमीन माफिया के खिलाफ सख्त अभियान की घोषणा की थी। सोमवार को दिए गए बयान को उसी दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब भूमाफिया को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे समयबद्ध तरीके से मामलों का निपटारा करें। मंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में भूमाफिया सक्रिय हैं या प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालते हैं तो तत्काल सूचना दें ताकि सख्त कार्रवाई की जा सके।
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भूमि विवादों के समाधान को लेकर सरकार की रणनीति में जन संवाद और फील्ड विजिट को भी शामिल किया गया है। मंत्री द्वारा विभिन्न जिलों में जन कल्याण संवाद कार्यक्रम आयोजित कर शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुनी गईं, जिसमें बड़ी संख्या में जमीन से जुड़े मामले सामने आए। इस दौरान प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठे और मंत्री की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचने की बात सामने आई, लेकिन मंत्री ने अपने अभियान को जारी रखने का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान आगामी समय में प्रशासनिक जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
विधान परिषद में मंत्री ने कुछ अन्य अहम फैसलों की भी घोषणा की, जिनमें शव वाहनों पर लगाए जाने वाले टैक्स को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने इसे मानवीय दृष्टिकोण से जरूरी बताते हुए कहा कि शोकग्रस्त परिवारों पर आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। इसके साथ ही राज्य में खुले में मांस बिक्री पर रोक लगाने की बात भी कही गई है, जिसके तहत अब लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा और बिना लाइसेंस बिक्री पर कार्रवाई की जाएगी।






















