बिहार में वर्षों से लोगों की परेशानी का कारण बने जमीन से जुड़े मापी विवाद अब लंबा खिंचने वाले नहीं हैं। राज्य सरकार ने भूमि मापी व्यवस्था (Bihar Land Measurement) में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए इसे पूरी तरह समयबद्ध, पारदर्शी और ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व प्रशासन में भरोसे और जवाबदेही की नई मिसाल भी कायम होगी।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि अब अविवादित जमीन की मापी अधिकतम सात दिनों में पूरी कर ली जाएगी, जबकि विवादित मामलों में भी यह प्रक्रिया ग्यारह दिनों से ज्यादा नहीं चलेगी। मापी पूरी होने के बाद चौदह दिनों के भीतर उसकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिससे किसी भी स्तर पर देरी या मनमानी की गुंजाइश नहीं बचेगी।
विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, ‘भूमि कल्याण जन संवाद’ कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने जमीन मापी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराईं थीं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर राज्य सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के तहत सेवाओं को सरल, तेज और भरोसेमंद बनाने की दिशा में यह ठोस कदम उठाया है। नई व्यवस्था में डिजिटल आवेदन, ऑनलाइन ट्रैकिंग और तय समय-सीमा से जनता को सीधे लाभ मिलेगा।
लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 26 जनवरी से 31 मार्च तक ‘मापी महाअभियान’ चलाया जा रहा है। इस विशेष अभियान का उद्देश्य उन मामलों को सुलझाना है, जो सालों से सरकारी फाइलों में अटके हुए थे। सरकार का मानना है कि तय समय-सीमा और डिजिटल निगरानी से न केवल पुराने विवाद सुलझेंगे, बल्कि नए मामलों में भी अनावश्यक उलझन नहीं होगी।
राज्य सरकार का यह कदम जमीन विवादों को कम करने के साथ-साथ राजस्व तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस नई व्यवस्था का अधिकतम लाभ उठाएं और डिजिटल माध्यम से ही आवेदन करें। उनका कहना है कि यह पहल बिहार में भूमि विवाद की जड़ पर प्रहार करेगी और प्रशासन व जनता के बीच विश्वास को मजबूत बनाएगी।






















