बिहार विधान परिषद में बुधवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Bihar Land Dispute) के कामकाज पर हुई चर्चा ने राज्य की सबसे जटिल समस्या माने जाने वाले भूमि विवाद को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया। उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में बताया कि भूमि परिमार्जन के मामलों में आई तेजी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह गांव-गांव तक फैले विवादों के समाधान की दिशा में ठोस बदलाव का संकेत है। दिलचस्प यह रहा कि सभापति अवधेश नारायण सिंह के साथ-साथ विपक्षी सदस्यों ने भी इस पहल की खुले मंच से सराहना की, जिससे यह मुद्दा सियासी आरोप-प्रत्यारोप से आगे एक प्रशासनिक सुधार के रूप में उभरा।
जदयू के नीरज कुमार ने सरकार की पहल के सामाजिक प्रभाव की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि कभी बिहार में होने वाली हत्याओं में 61 फीसदी मामलों की जड़ भूमि विवाद हुआ करता था, लेकिन हाल के वर्षों में यह अनुपात घटकर 41 फीसदी पर आ गया है। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि जमीन से जुड़े झगड़ों का निपटारा केवल राजस्व विभाग का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सदन में यह भी पूछा कि राज्य में भूमि परिमार्जन के लिए आए 8363 आवेदनों में से कितनों का निष्पादन हुआ है।
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इस पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि हर जिले में वर्षों से लंबित मामलों को प्राथमिकता पर निपटाने का अभियान चलाया गया है। उन्होंने पूर्णिया की एक महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे दशकों से अटका भूमि परिमार्जन का मामला त्वरित कार्रवाई से सुलझाया गया। मंत्री के अनुसार राज्य में कुल मिलाकर करीब 46 लाख भूमि परिमार्जन से जुड़े मामले दर्ज हैं और हाल के 8363 आवेदनों में से 2414 का त्वरित निष्पादन हो चुका है। उनका कहना था कि यह शुरुआत है और सिस्टम में बदलाव के साथ गति और बढ़ेगी।
विजय सिन्हा के जवाब पर सभापति अवधेश नारायण सिंह ने संतोष जताते हुए कहा कि विभागीय सुधारों की चर्चा हर जगह हो रही है। हालांकि बहस के दौरान राजद के डॉ. सुनील सिंह ने व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया और कहा कि राज्य के 534 प्रखंडों में ऐसा कोई इलाका नहीं है जहां बिना पैसे के काम हो रहा हो। इस पर उपमुख्यमंत्री ने तीखे अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जैसे मौसम बदलने पर लोग कपड़े बदलते हैं, वैसे ही विभागीय कामकाज का तरीका बदला है तो व्यवस्था में शामिल लोगों को भी बदलना पड़ेगा।






















