बिहार की राजनीति एक बार फिर सामाजिक न्याय की विरासत को लेकर चर्चा में है। बिहार विधानमंडल के सत्र के दौरान बोधगया से विधायक कुमार सर्वजीत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) की प्रतिमा बिहार विधानसभा परिसर में स्थापित करने की मांग उठाकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
सदन में बोलते हुए कुमार सर्वजीत ने कहा कि रामविलास पासवान केवल बिहार के नेता नहीं थे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्ग की सशक्त आवाज के रूप में पहचाने जाते थे। उनका राजनीतिक जीवन सामाजिक न्याय, समान अवसर और हाशिये के समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के संघर्ष का प्रतीक रहा है। ऐसे नेता की स्मृति को संस्थागत सम्मान मिलना चाहिए और विधानसभा परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित करना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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बिहार विधानसभा, जो राज्य की लोकतांत्रिक परंपराओं का केंद्र है, वहां किसी नेता की प्रतिमा लगाना केवल श्रद्धांजलि भर नहीं बल्कि राजनीतिक और वैचारिक संदेश भी माना जाता है। कुमार सर्वजीत ने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यह जानने का अवसर मिलना चाहिए कि किस तरह रामविलास पासवान ने दशकों तक केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई प्रधानमंत्रियों की सरकारों में मंत्री रहते हुए गरीबों के मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडा बनाया।
सदन में इस प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के कुछ सदस्यों ने समर्थन जताया। हालांकि कुछ विधायकों ने यह भी सुझाव दिया कि इस विषय पर सर्वदलीय सहमति बनाकर निर्णय लिया जाना चाहिए ताकि इसे राजनीतिक विवाद का रूप न दिया जाए। इस दौरान सदन में संक्षिप्त चर्चा भी हुई, जिससे स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और जोर पकड़ सकता है।






















