Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ दो महीने बचे हैं और अभी तक न तो एनडीए और न ही महागठबंधन में सीटों का बंटवारा तय हो पाया है। इसी बीच सहयोगी दलों की प्रेशर पॉलिटिक्स तेज हो गई है। कई सीटों पर खींचतान की स्थिति बन सकती है, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियों में मटिहानी विधानसभा सीट आ गई है, जहां सियासी हलचल लगातार बढ़ रही है।
मटिहानी से चार बार विधायक रहे जेडीयू नेता नरेंद्र सिंह उर्फ बोगो सिंह ने बड़ा फैसला लेते हुए अब राजद से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि “राजद हमारा है और हम राजद के हैं। जनता की भी यही इच्छा है कि एक बार फिर बोगो सिंह मटिहानी से चुनाव लड़ें।” तेजस्वी यादव की “अधिकार यात्रा” के दौरान 17 सितंबर को बेगूसराय में चार जगहों पर होने वाली सभाओं में बोगो सिंह भी सक्रिय भूमिका में दिखेंगे।
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मटिहानी सीट पर 2020 में महागठबंधन की ओर से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को टिकट मिला था। उस चुनाव में लोजपा उम्मीदवार राजकुमार सिंह ने जेडीयू के टिकट पर उतरे बोगो सिंह को केवल 333 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। वहीं माकपा के राजेंद्र सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे और वे भी महज 765 वोटों से हार गए थे। इस बेहद करीबी मुकाबले ने इस सीट को और भी अहम बना दिया है। यही कारण है कि इस बार माकपा अपनी दावेदारी फिर से मजबूत कर रही है, जिससे महागठबंधन के भीतर तनाव बढ़ सकता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि देखें तो मौजूदा जेडीयू विधायक राजकुमार सिंह, जिन्होंने पिछला चुनाव लोजपा से जीता था, बाद में जेडीयू में शामिल हो गए। यही वजह रही कि बोगो सिंह खुद को हाशिए पर महसूस करने लगे। इसी असहजता ने उनके भीतर नाराज़गी पैदा की और वे धीरे-धीरे राजद के करीब आते गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने एनडीए उम्मीदवार का खुलकर विरोध किया और महागठबंधन का समर्थन किया। अब राजद में उनकी औपचारिक एंट्री और तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद मटिहानी सीट का समीकरण पूरी तरह से बदल गया है।
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विश्लेषकों का मानना है कि बोगो सिंह के राजद में शामिल होने से मटिहानी न केवल महागठबंधन के भीतर बल्कि एनडीए के लिए भी चुनौतीपूर्ण सीट बन जाएगी। अगर इस सीट पर माकपा और राजद दोनों ही दावेदारी करते हैं, तो महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं, एनडीए में भी सहयोगियों के बीच सीटों की मांग को लेकर पेंच फंसने की पूरी संभावना है। कुल मिलाकर मटिहानी इस बार चुनावी गणित की सबसे अहम और विवादित सीट बन सकती है।






















