नीतीश कुमार की अगुवाई वाली नई सरकार में 26 मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार (Bihar NDA Cabinet Expansion) की संभावनाएँ तेज हो गई हैं। वर्तमान में बिहार कैबिनेट में कुल नौ मंत्री पद खाली हैं, जिनमें जेडीयू के छह और बीजेपी के तीन कोटे शामिल हैं। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि दोनों दल बहुत जल्द इन खाली पदों को भरने की तैयारी में जुट गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक और नए सामाजिक समीकरणों के आधार पर की जाएगी। जेडीयू संगठन के भीतर चर्चा है कि पार्टी उन विधायकों पर भरोसा करेगी जो कुशवाहा समुदाय और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से आते हैं। यह रणनीति राज्य में पार्टी के सामाजिक विस्तार को मजबूत करने और भविष्य की राजनीतिक जमीन को सुरक्षित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
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वर्तमान कैबिनेट में कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग होने के चलते कार्यभार का संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव पांच विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि विजय चौधरी के पास चार विभाग हैं। इसके अलावा श्रवण कुमार और सुनील कुमार के पास दो-दो विभागों का प्रभार है। बीजेपी के मंत्रियों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है—विजय कुमार सिंह, मंगल पांडेय, नितिन नवीन और अरुण शंकर प्रसाद प्रत्येक दो विभाग संभाल रहे हैं।
भाजपा और जेडीयू के मंत्री पदों का आंकड़ा
एनडीए के सहयोगी दलों के बीच मंत्रिपरिषद में कुल 36 पदों का बंटवारा किया गया है।
बीजेपी के पास कुल 17 मंत्री पद (मुख्यमंत्री सहित)
जेडीयू के पास कुल 15 मंत्री पद (मुख्यमंत्री सहित)
एलजेपी के पास 2
एचएएम और आरएलपी के पास 1-1 मंत्री पद
इस आंकड़े के अनुसार, बीजेपी के खाते से 3 और जेडीयू के खाते से 6 नए मंत्री शामिल किए जा सकते हैं।






















