NDA की अप्रत्याशित (Bihar NDA Win) जीत के बाद बिहार की राजनीतिक हवा तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। परिणामों ने न केवल सत्ता समीकरणों को पलट दिया है, बल्कि विपक्ष के भीतर भी गहरी मंथन-प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी दौर में राजद सांसद मनोज झा का बयान राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ रहा है। उन्होंने NDA को शुभकामनाएं देते हुए साफ कहा कि बिहार के लिए जो ब्लू प्रिंट तेजस्वी यादव ने रोजगार, पलायन-नियंत्रण और सामाजिक सुरक्षा को लेकर तैयार किया था, अब उस पर सत्तापक्ष को गंभीरता से काम करना चाहिए।
मनोज झा का यह बयान महज एक बधाई संदेश नहीं, बल्कि नए राजनीतिक यथार्थ का विश्लेषणात्मक संकेत भी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जीत के बाद विपक्ष भले ही संख्या में बाहर खड़ा दिखे, लेकिन जनादेश के बीच भी विपक्ष की भूमिका खत्म नहीं होती। उनका कहना था कि चुनावी नतीजे सामान्य चुनाव की तरह नहीं लगे और यह जरूरी है कि जल्दबाज़ी में निष्कर्ष न निकाले जाएं। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य के मूल मुद्दे—युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और बिहार को पलायन के चक्र से बाहर निकालना—आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे, और इन सवालों को कोई भी जनादेश दबा नहीं सकता।
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RJD नेता मृत्युंजय तिवारी ने भी NDA की इस बड़ी जीत को अप्रत्याशित बताते हुए कहा कि इन नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। उनके मुताबिक किसी भी एग्जिट पोल में इस तरह के परिणाम की भविष्यवाणी नहीं की गई थी। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी अब इन नतीजों के कारणों की गहराई से समीक्षा करेगी क्योंकि ऐसा क्या हुआ जिसने जनमत को पूरी तरह बदल दिया। तिवारी का कहना है कि इस तरह के परिणाम निश्चित रूप से चर्चा, विश्लेषण और आत्ममंथन की मांग करते हैं।






















