Bihar Caste Politics 2025: बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन हो या नई सरकार का गठन, जातीय समीकरण हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। 20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार ने लगातार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इसी के साथ यह साफ हो गया कि नई सरकार का मंत्रिमंडल जातीय आधार पर व्यापक संतुलन साधने की एक रणनीतिक कोशिश है। भाजपा कोटे से 14, जेडीयू से 8, लोजपा (रा) से 2, रालोमो से 1 और हम से 1 मंत्री बनाए गए हैं। पूरे मंत्रिमंडल की संरचना का विश्लेषण बताता है कि एनडीए ने 2025 में जातिगत राजनीति की नब्ज समझते हुए अपनी टीम तैयार की है।
सबसे बड़ा संकेत ब्राह्मण समुदाय की हिस्सेदारी में आई भारी कटौती से मिलता है। पिछली कैबिनेट में भाजपा ने मंगल पांडे और नीतीश मिश्रा को शामिल किया था, लेकिन इस बार भाजपा और जेडीयू दोनों ने मिलकर ब्राह्मण कोटे को आधे से भी कम कर दिया। भाजपा की ओर से सिर्फ मंगल पांडे को जगह मिली है।
राजपूत समुदाय को नई सरकार में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। संजय टाइगर, श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह और संजय सिंह जैसे चार प्रमुख चेहरों को शामिल कर भाजपा ने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।
भूमिहार जाति के मामले में गठबंधन ने दोहरी उपस्थिति देकर संतुलन बनाए रखा है। विजय कुमार सिन्हा और विजय चौधरी दोनों प्रभावशाली भूमिहार नेताओं को मंत्रालय देकर भाजपा ने स्पष्ट किया है कि यह समुदाय अब भी सत्ता समीकरण में मजबूत प्रभाव रखता है।
कायस्थ समुदाय का प्रतिनिधित्व पटना और शहरी राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। नितिन नवीन को मंत्री बनाकर भाजपा ने शहरी मतदाताओं, खासकर मध्यवर्गीय और उच्च शिक्षित वर्ग में अपनी पैठ को मजबूत करने का संकेत दिया है।
ओबीसी की बात करें तो यह समूह बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा आधार बना हुआ है और इसलिए एनडीए ने इन्हें पर्याप्त और प्रभावशाली प्रतिनिधित्व दिया है। कुशवाहा समुदाय से सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री पद पर हैं, जबकि दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक विरासत को संरक्षित रखने की कोशिश की गई है। यादव समुदाय से रामकृपाल यादव और विजेंद्र प्रसाद यादव को शामिल कर भाजपा-जेडीयू गठबंधन ने आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है।
कुर्मी समुदाय से श्रवण कुमार की मौजूदगी नीतीश कुमार के राजनीतिक आधार को मजबूत करती है। वहीं चंद्रवंशी समाज से प्रमोद कुमार को शामिल कर ओबीसी के अन्य उपसमूहों को भी प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।
अति पिछड़ा वर्ग यानी ईबीसी और एससी के प्रतिनिधित्व को इस सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बिहार की आबादी में सबसे बड़ा अनुपात रखने वाले इस समूह के सुरेंद्र मेहता, रमा निषाद, मदन सहनी, लखेंद्र कुमार रोशन, सुनील कुमार, संतोष सुमन और संजय कुमार मंत्री बनाए गए हैं। मुस्लिम समुदाय को प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व देते हुए मोहम्मद जमा खान को कैबिनेट में शामिल किया गया है।
कुल मिलाकर, नई नीतीश सरकार का कैबिनेट 2025 चुनावों के सामाजिक संकेतों पर आधारित एक ठोस राजनीतिक फॉर्मूला प्रस्तुत करता है, जिसमें जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, गठबंधन राजनीति और सामाजिक न्याय का अनूठा मिश्रण दिखाई देता है।






















