Bihar News: बिहार की नौकरशाही और सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस को बड़ी प्रशासनिक राहत देते हुए उनका निलंबन समाप्त कर दिया है। इस फैसले के साथ ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि लंबे समय से खाली चल रही उनकी भूमिका में अब जल्द ही नई तैनाती देखने को मिलेगी।
संजीव हंस राज्य के ऊर्जा विभाग के पूर्व प्रधान सचिव रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से उन्हें प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता है। अक्टूबर 2024 में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद उनका निलंबन हुआ था, लेकिन पटना हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं। जमानत मिलने के तुरंत बाद उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान भी दे दिया था, जिसे अब निलंबन समाप्त करने की कार्रवाई ने निर्णायक मोड़ दे दिया है।
मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पटना हाई कोर्ट ने संजीव हंस को जमानत देते हुए स्पष्ट किया था कि अभियोजन पक्ष की ओर से अभी तक ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि कथित अवैध धन का वास्तविक लेनदेन या उपयोग हुआ। अदालत ने यह भी माना कि जांच में कई प्रक्रियात्मक और तथ्यात्मक खामियां हैं, ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त भी रखी कि वे देश से बाहर नहीं जाएंगे और नियमित रूप से अदालत में पेश होंगे।
करीब एक साल तक जेल में रहने के बाद संजीव हंस की रिहाई और अब निलंबन की समाप्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अक्टूबर 2024 में ईडी ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद वे पटना की बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में थे। इसी मामले में स्मार्ट मीटर समेत अन्य टेंडरों से जुड़े निजी कंपनियों के तीन आरोपियों को भी हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जो लगभग दस महीने से जेल में बंद थे।






















