विश्वविख्यात सोनपुर मेला रविवार की सुबह तब अचानक राजनीतिक हलचल के केंद्र में बदल गया, जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar Sonepur Mela) बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के सीधे मेले में पहुंच गए। उनके आगमन की भनक लगते ही जिला प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर ग्राउंड टीम तक सब सक्रिय मोड में आ गए। यह औचक दौरा केवल एक परंपरागत निरीक्षण नहीं था, बल्कि इसे नीतीश कुमार की नई राजनीतिक सक्रियता और सख्त प्रशासनिक स्टाइल की झलक के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मेले में पहुंचकर मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सरकारी विभागों के स्टॉलों का जायजा लिया। वह आर्ट एंड क्राफ्ट ज़ोन में रुके और स्थानीय कलाकारों से विस्तार से बातचीत की। कलाकारों ने अपने काम, बिक्री में आ रही चुनौतियों, मार्केट सपोर्ट की कमी और सरकारी योजनाओं के लाभ-हानि पर बेझिझक चर्चा की। नीतीश कुमार ने भी एक-एक पहलू को नोट करते हुए अधिकारियों को तुरंत सुझाव लागू करने के निर्देश दिए। यह संवाद कलाकारों के लिए उस माहौल से बिल्कुल अलग था जहां वे अक्सर अपनी बात कहने के लिए मंच तलाशते रहते हैं।
मुख्यमंत्री ने मेले की स्वच्छता, भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंधन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने स्थानीय आगंतुकों से भी बातचीत की और पूछताछ की कि मेला प्रबंधन को लेकर उनकी क्या राय है, क्या परेशानियां हैं और किन बिंदुओं पर सुधार होना चाहिए। आम लोगों से सीधा फीडबैक लेना यह दर्शाता है कि सरकार मेले को एक पर्यटन और आर्थिक अवसर के रूप में और अधिक प्रभावी बनाने की योजना पर काम कर रही है।
इस दौरान भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, जिले के डीएम, कमिश्नर और पुलिस प्रशासन भी उनके साथ मौजूद थे। मंत्री और अधिकारियों ने स्वास्थ्य समिति, महिला विकास निगम, श्रम संसाधन विभाग, एनडीआरएफ सहित अन्य विभागों के स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और कमियों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस तरह से लगातार फील्ड विज़िट और औचक निरीक्षण किए हैं, उससे यह साफ संकेत मिलता है कि वे सिस्टम में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं चाहते। नीतीश के इस अचानक दौरे से प्रशासनिक तंत्र जहां चौकन्ना हो गया, वहीं आम लोगों के बीच उत्साह देखते बन रहा था।






















