बिहार विधान परिषद के हालिया सत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राबड़ी देवी के बीच हुई तीखी नोंक-झोंक ने प्रदेश की राजनीति (Bihar Politics) में शिष्टाचार और भाषा की मर्यादा पर नई बहस छेड़ दी है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने राजद की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति इस्तेमाल की गई भाषा को अनुचित करार दिया। उनका कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बारे में असंतुलित और मर्यादा से परे शब्दों का प्रयोग न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह लोकतांत्रिक विमर्श की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
विजय सिन्हा ने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं के शब्द समाज में दूरगामी संदेश देते हैं। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन इन मतभेदों को व्यक्त करने की भाषा संयमित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सदन जैसे संवैधानिक मंच पर शब्दों की मर्यादा टूटती है, तो उसका असर केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिकों के व्यवहार और सोच पर भी पड़ता है। यही वजह है कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे असहमति जताते समय भी लोकतांत्रिक संस्कारों का पालन करें।
डिप्टी सीएम ने बहस के दौरान मुख्यमंत्री के निजी संबंधों को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री और संबंधित व्यक्ति के बीच देवर-भोजाई का पारिवारिक रिश्ता है, जिसमें स्वाभाविक रूप से अपनत्व और पारिवारिक भावनाएं शामिल होती हैं। ऐसे रिश्तों को राजनीतिक चश्मे से देखना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि सामाजिक रिश्तों की गरिमा को भी कमतर करता है। उनके मुताबिक, निजी रिश्तों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हथियार बनाना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान नहीं हो सकती।






















