बिहार में खेल और तकनीक का भविष्य बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में ओलंपिक एकेडमी (Bihar Olympic Academy) की स्थापना की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को खोजना, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देना और राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। रविवार को शेखपुरा दौरे पर पहुंचीं खेल तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह ने बताया कि सरकार ने हर जिले में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, साथ ही खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
शेखपुरा बाइपास स्थित लोजपा (आर) कार्यालय में जिला अध्यक्ष इमाम गजाली के नेतृत्व में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में श्रेयसी सिंह ने कहा कि सरकार न केवल खेल प्रतिभाओं को उभारने में जुटी है, बल्कि बिहार को अगले कुछ वर्षों में आईटी और विज्ञान–प्रौद्योगिकी के बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसी रणनीति के तहत राज्य के सभी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोले गए हैं, जिससे नई पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा और रोजगार के बड़े अवसर मिल सकें।
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मंत्री ने कहा कि बिहार में वर्षों से छिपी खेल प्रतिभाओं को अब एक संगठित प्लेटफॉर्म मिलने जा रहा है। ओलंपिक एकेडमी की स्थापना से न केवल अत्याधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और फिटनेस इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होगा, बल्कि गांव–कस्बों में बैठे ऐसे युवा भी सामने आएंगे जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता है। सरकार के अनुसार, यह पहल बिहार को खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाएगी और राज्य की खेल प्रतिस्पर्धा क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नए आयाम देगी।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार की नई सरकार में श्रेयसी सिंह को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। श्रेयसी सिंह लगातार दूसरी बार जमुई से भाजपा विधायक चुनी गई हैं। वे केवल राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ी भी हैं। उनके पिता दिवंगत दिग्विजय सिंह बिहार की राजनीति में एक मजबूत हस्ती रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे थे, जबकि उनकी मां पुतुल देवी भी सांसद रहीं। खेल से लेकर राजनीति तक की यह पृष्ठभूमि श्रेयसी के कामकाज में स्पष्ट दिखाई देती है, जहां वे बिहार को खेल और विज्ञान–प्रौद्योगिकी के नए दौर में ले जाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही हैं।






















