बिहार में खेती (Bihar Organic Farming) का चेहरा बदलने की तैयारी अब नीति से आगे बढ़कर जमीन पर दिखने लगी है। राज्य सरकार ने टिकाऊ और दीर्घकालीन कृषि प्रणाली को मजबूत करने के लक्ष्य के साथ जैविक खेती को रणनीतिक प्राथमिकता बना दिया है। कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव के मुताबिक बिहार राज्य जैविक मिशन के तहत वर्मी कम्पोस्ट पीट इकाई, गोबर/बायो गैस यूनिट और व्यवसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों का संचालन सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने का व्यावहारिक मॉडल बनाया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता ने मिट्टी की उर्वराशक्ति को कमजोर किया है और खेती की लागत बढ़ाई है। इसी चुनौती के जवाब में सरकार जैविक और कार्बनिक उर्वरकों को बढ़ावा देकर खेती को फिर से प्राकृतिक संतुलन की ओर मोड़ना चाहती है। मंत्री के अनुसार, जैविक खेती अपनाने से फसल उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है, लागत घटती है और लंबी अवधि में पैदावार स्थिर रहती है, जिससे किसानों की आमदनी में टिकाऊ बढ़ोतरी संभव होती है। यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पशु-पक्षियों और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी है, क्योंकि रासायनिक अवशेषों का दबाव कम होने से खाद्य सुरक्षा बेहतर होती है।
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योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सरकार ने खास जोर दिया है। ऑनलाइन डीबीटी पोर्टल के माध्यम से आवेदन लेकर “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर स्वीकृति दी जा रही है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचे। पक्का वर्मी कम्पोस्ट पीट इकाई योजना के तहत किसान एक से अधिक यूनिट लगाकर अपने खेतों के लिए जैविक खाद खुद तैयार कर सकते हैं, जिससे बाजार पर निर्भरता घटती है। गोबर और बायो गैस इकाई के जरिए खेतों में जैविक खाद के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प भी खुलता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए दोहरा लाभ लेकर आता है।
व्यवसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों को लेकर सरकार की सोच और भी व्यापक है। बड़े पैमाने पर उत्पादन से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर बनेंगे और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का नया स्रोत तैयार होगा। यह मॉडल खास तौर पर उन किसानों और उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है जो खेती के साथ कृषि-आधारित व्यवसाय खड़ा करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सही तरीके से लागू होती है तो बिहार में सब्जी उत्पादन को जैविक दिशा में मोड़ने की बड़ी संभावना बन सकती है, जिससे राज्य की पहचान ऑर्गेनिक प्रोड्यूस हब के रूप में उभर सकती है।
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सरकार की रणनीति साफ है कि जैविक खेती को सिर्फ सरकारी योजना न बनाकर जन-आंदोलन का रूप दिया जाए। किसानों से अपील की गई है कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी जमीन की उर्वरता को पुनर्जीवित करें और बदलते बाजार में जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग का फायदा लें।






















