Patna Police Promotion: बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच नीतीश कुमार सरकार ने प्रशासनिक मोर्चे पर एक निर्णायक कदम उठाते हुए राजधानी पटना के पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल कर दिया। सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के बाद जिले में तैनात चार वरीय पुलिस उपाधीक्षकों को अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर प्रोन्नत किया गया और पदभार ग्रहण की तारीख से ही प्रोमोशन ग्रेड लागू कर दिया गया। यह कदम केवल विभागीय पदोन्नति भर नहीं माना जा रहा, बल्कि बढ़ते अपराध के आरोपों के बीच शासन की जवाबदेही और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने का संकेत भी माना जा रहा है।
प्रोन्नति पाने वालों में कानून-व्यवस्था की कमान संभाल चुके कृष्ण मुरारी प्रसाद, संजीत कुमार प्रभात, राजकुमार शाह और सुमित कुमार शामिल हैं। राजधानी जैसे संवेदनशील शहरी केंद्र में तैनाती का अनुभव रखने वाले इन अधिकारियों को नई रैंक के साथ अधिक अधिकार और जवाबदेही मिली है। विभागीय हलकों में इसे नेतृत्व क्षमता और फील्ड परफॉर्मेंस को प्राथमिकता देने वाली नीति के रूप में देखा जा रहा है, ताकि पुलिसिंग का असर सीधे जमीन पर दिखे।
प्रमोशन के बाद कृष्ण मुरारी प्रसाद और संजीत कुमार प्रभात औपचारिक रूप से एसएसपी कार्यालय पहुंचे, जहां परंपरा के अनुसार कंधों पर अशोक स्तंभ का बैज पहनाया गया। इस मौके पर कार्तिकेय शर्मा ने नई जिम्मेदारी के साथ जनता की सुरक्षा के प्रति अधिक तत्परता की अपेक्षा जताई और टीमवर्क को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। साथियों ने मिठाई और पुष्पगुच्छ भेंट कर मनोबल बढ़ाया, जिससे यह साफ हुआ कि विभाग भीतर से भी इस बदलाव को सकारात्मक रूप में ले रहा है।
कृष्ण मुरारी प्रसाद 2013 बैच के अधिकारी हैं और पिछले दो वर्षों से राजधानी में कानून-व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे पहले वे नालंदा जिले में सेवाएं दे चुके हैं, जहां चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनकी कार्यशैली की सराहना हुई थी। उनके अनुभव और क्षेत्रीय समझ को देखते हुए यह पदोन्नति पुलिस के रणनीतिक पुनर्संतुलन की दिशा में एक भरोसेमंद कदम मानी जा रही है।
इसी के साथ थानों के स्तर पर भी जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है ताकि फील्ड पर नियंत्रण और जवाबदेही सख्त हो सके। फतुहा थाने में तत्काल प्रभाव से बदलाव, सुल्तानगंज थाने की नई जिम्मेदारी और गुलजारबाग टीओपी की कमान नए प्रभारी को सौंपे जाने को शहर की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की प्रशासनिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।






















