Bihar politics: बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और इसकी वजह बना है खरमास के बाद संभावित सियासी फेरबदल। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में मंत्री संजय सिंह के एक बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मंत्री ने दावा किया है कि खरमास समाप्त होते ही बिहार कांग्रेस के सभी छह विधायक एनडीए का दामन थाम लेंगे। इस दावे के सामने आते ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
दरअसल, पिछले साल बिहार में सत्ता समीकरण बदलने और नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद से ही विधायकों की अदला-बदली को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। पहले एनडीए नेताओं की ओर से राष्ट्रीय जनता दल में टूट के संकेत दिए गए, और अब सीधे कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने की बात सामने आ रही है। संजय सिंह का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त होने वाला है और राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की परंपरा रही है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कोटे से मंत्री बने संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के सभी छह विधायक लगातार एनडीए नेताओं के संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि अब बस कुछ दिनों का इंतजार बाकी है और खरमास खत्म होते ही तस्वीर साफ हो जाएगी। मंत्री के मुताबिक, बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की पटकथा लगभग तैयार है और इसका असर जल्द दिखेगा।
मंत्री के इस बयान के बाद जेडीयू की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के एमएलसी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी के विधायकों को यह एहसास हो चुका है कि बिहार की जनता का भरोसा नीतीश कुमार के साथ है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि जब जन समर्थन एक तरफ हो, तो विधायकों की राजनीतिक दिशा बदलना अस्वाभाविक नहीं है। जेडीयू के इस बयान को एनडीए के आत्मविश्वास के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं विपक्ष ने इस पूरे दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने मंत्री संजय सिंह के बयान को राजनीतिक शोरगुल करार दिया। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए सरकार को पलायन, रोजगार, गरीबी और बेहतर शासन जैसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसे आरोपों का माहौल बनाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि उसके विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और किसी तरह के दबाव या प्रलोभन में नहीं आने वाले।
यह पहली बार नहीं है जब बिहार में खरमास के बाद ‘खेला’ होने की चर्चा हो रही हो। इससे पहले भी एनडीए नेताओं ने दावा किया था कि आरजेडी के कई विधायक असंतुष्ट हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं। उस वक्त भी कहा गया था कि खरमास खत्म होते ही कई बड़े नाम सत्तापक्ष के समर्थन में आ सकते हैं। हालांकि, अब तक ये दावे केवल बयानबाजी तक ही सीमित रहे हैं।
14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त होने वाला है। इसके बाद क्या वाकई कांग्रेस या आरजेडी के विधायक पाला बदलते हैं या यह सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की कवायद साबित होती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में सन्नाटा नहीं, बल्कि सरगर्मी और अटकलों का दौर चल रहा है।






















