बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल को लेकर इन दिनों हलचल तेज होती जा रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि राजद संगठन और नेतृत्व स्तर पर बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Lalu Rabri Active) का बुधवार सुबह एक साथ 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास से निकलना कई संदेश दे गया। दोनों महुआबाग और कोटिल्य नगर में बन रहे अपने निजी आवास का निरीक्षण करने पहुंचे, जिसे केवल एक पारिवारिक औपचारिकता नहीं बल्कि राजनीतिक गतिविधि के रूप में भी देखा जा रहा है।
दरअसल, राबड़ी आवास को खाली किए जाने की प्रक्रिया के चलते लालू प्रसाद यादव पिछले कुछ समय से अपने नए आवास के निर्माण कार्य पर नियमित नजर बनाए हुए हैं। लेकिन आज का दृश्य इसलिए खास रहा क्योंकि पहली बार राबड़ी देवी भी स्वयं बाहर निकलकर निरीक्षण में शामिल हुईं। बिहार की राजनीति में राबड़ी देवी का सार्वजनिक रूप से सक्रिय होना हमेशा संकेतों से जोड़ा जाता रहा है और यही वजह है कि इस दौरे को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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राजद के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, पार्टी अब संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। लालू–राबड़ी की सक्रियता को आने वाले राजनीतिक फैसलों की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब विपक्षी खेमे भाजपा और जदयू पहले ही अपने संगठन में बदलाव कर चुके हैं, राजद पर भी दबाव है कि वह नए नेतृत्व मॉडल के साथ आगे बढ़े।
इसी कड़ी में 25 जनवरी को राजधानी पटना के होटल मौर्य में प्रस्तावित राजद की अहम बैठक को बेहद निर्णायक माना जा रहा है। इस बैठक में पार्टी की रणनीति, संगठन विस्तार और नेतृत्व संरचना पर गंभीर मंथन संभव है। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि राजद में भी भाजपा और जदयू की तरह कार्यकारी अध्यक्ष की परंपरा की शुरुआत हो सकती है, जिससे आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को नई धार देने की कोशिश की जाएगी।






















