विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। मौजूदा सियासी हालात पर बड़ा बयान देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि राज्य में सत्ता के समीकरण कभी भी बदल सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या बिहार में फिर कोई “खेल” होने वाला है, तो उनका जवाब सीधा लेकिन अर्थपूर्ण था—इंतजार कीजिए, समय सब बता देगा। सहनी ने यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी नहीं पता कि वे कब तक इस पद पर बने रहेंगे।
मुकेश सहनी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री को हटाने की एक पूरी साजिश चल रही है और सत्ता के गलियारों में अंदरखाने गतिविधियां तेज हैं। उनके मुताबिक कौन विधायक किसके संपर्क में है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी नाम गिनाने या खुलासे करने का वक्त नहीं है, लेकिन समय आने पर सब कुछ सामने आ जाएगा। इस बयान को आगामी चुनावों से पहले संभावित राजनीतिक फेरबदल के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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तेजस्वी यादव के विदेश दौरे को लेकर शिवानंद तिवारी द्वारा दी गई नसीहत पर प्रतिक्रिया देते हुए सहनी ने अलग ही कोण रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव सिर पर हैं और फिलहाल लड़ाई बिहार में रहकर लड़ी जाएगी। सरकार को तीन महीने का समय दिया गया है कि वह अपने वादों को पूरा करे, खासकर महिलाओं और आजीविका दीदियों से जुड़े मुद्दों पर। यदि सरकार इस अवधि में विफल रहती है, तो विपक्ष सड़क पर उतरकर निर्णायक संघर्ष करेगा। सहनी ने यह भी स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव की अपनी निजी जिंदगी है और महागठबंधन में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है।
सत्ता पर हमला बोलते हुए मुकेश सहनी ने मौजूदा सरकार को “चोरी की सरकार” करार दिया। उनका आरोप था कि यह सरकार किसी भी तरीके से बनी हो—चाहे पैसे के बल पर या अन्य हथकंडों से—लेकिन जनता के साथ विश्वासघात हुआ है। उन्होंने दावा किया कि ₹10,000 देकर लोगों के घर तक लिखे गए, जो लोकतंत्र की आत्मा पर सवाल खड़े करता है। सहनी ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी द्वारा निकाली गई “वोटर अधिकार यात्रा” के जरिए 18 लाख लोगों के नाम जोड़े गए, जो यह बताता है कि जनता बदलाव चाहती है।
चुनाव आयोग को लेकर भी सहनी ने तीखा रुख अपनाया। उनका कहना है कि जो काम सरकार और चुनाव आयोग का होना चाहिए, वह काम विपक्ष को करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त निष्पक्षता से काम नहीं कर रहे हैं। सहनी ने अंत में बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि बिहार और देश की जनता को यह समझना होगा कि जिस दिन दिल्ली में बदलाव होगा, उसी दिन पूरे देश में बदलाव की बयार बहेगी।






















