बिहार (Bihar Politics) में एनडीए की भारी चुनावी जीत के बाद नई सरकार ने औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है, लेकिन सत्ता के भीतर की खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। मंत्रालयों के बंटवारे के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा गृह विभाग को लेकर हो रही है, जो इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास न होकर भाजपा कोटे से डिप्टी सीएम बने सम्राट चौधरी को सौंपा गया है।बिहार में एनडीए की भारी चुनावी जीत के बाद नई सरकार ने औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है। मंत्रालयों के बंटवारे के बाद सबसे ज़्यादा चर्चा गृह विभाग को लेकर हो रही है, जो इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास न होकर भाजपा कोटे से डिप्टी सीएम बने सम्राट चौधरी को सौंपा गया है।
इसी मुद्दे पर महागठबंधन के प्रमुख सहयोगी और वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने नीतीश कुमार की स्थिति को लेकर तीखा तंज कसा है। सहनी का कहना है कि भाजपा ने नीतीश कुमार को सिर्फ नाममात्र का चेहरा बनाकर रखा है और गृह मंत्रालय छीन लेना इस बात का पहला उदाहरण है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में भाजपा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक अपने नियंत्रण में लेने में देर नहीं करेगी और नीतीश कुमार की भूमिका धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
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पत्रकारों से बातचीत में सहनी ने आरोप लगाया कि बिहार का लोकतांत्रिक ढांचा लगातार कमजोर हो रहा है और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया से लेकर सरकार गठन तक हर स्तर पर हस्तक्षेप करके लोकतंत्र की आत्मा को घायल किया है। उन्होंने कहा कि जो शासन बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान में ‘जनता का राज’ बताया गया था, वही आज ‘सत्ता के केंद्रीकरण’ में बदलता दिख रहा है। सहनी ने राहुल गांधी के एक हालिया ट्वीट का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति चुनावी धांधली और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण का जीता-जागता उदाहरण है, जिसे जनता को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
वीआईपी चीफ ने भाजपा पर गरीबों के प्रति ‘सहायता के नाम पर निर्भरता पैदा करने’ की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुफ्त राशन देना कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य नहीं, बल्कि वोट हासिल करने का हथकंडा बन गया है। उनके अनुसार गरीबों को सम्मान और अवसर चाहिए, न कि सिर्फ अनाज देकर यह संदेश कि उनका विकास चार किलो चावल तक सीमित है। सहनी ने कहा कि समाज का एक वर्ग नागरिकों को केवल ‘मतदाता’ बनाकर रखना चाहता है, लेकिन अब समय आ गया है कि जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खुद आवाज उठाए।
सहनी ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर का उद्देश्य समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना था, न कि मुफ्त योजनाओं के सहारे किसी को राजनीतिक रूप से कमजोर करना। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र वह है जो जनता के फैसलों से चलें, न कि किसी एक दल की रणनीति से। बिहार की मौजूदा राजनीति में जिस तरह के संकेत दिख रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में सत्ता के भीतर कई और हलचलें होने की संभावना है।






















