बिहार की राजनीति (Bihar Politics 2025) इस समय नए मोड़ पर खड़ी है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वर्षों पुरानी छवि ‘विकास पुरुष’ की रही है, लेकिन अब उसी विकास की बागडोर केंद्र सरकार अपने हाथ में लेती नजर आ रही है। भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिहार का चेहरा बनाकर प्रचार की कमान सौंपी है, उससे यह सवाल उठने लगा है — क्या भाजपा अब नीतीश कुमार पर भरोसा नहीं कर रही?
PM मोदी करेंगे मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत.. महिलाओं के खाते में 10 हजार होंगे ट्रांसफर
इस बहस को और गहराई तब मिली जब घोषणा हुई कि 26 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी खुद नीतीश कुमार की ड्रीम स्कीम – मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना – का उद्घाटन करेंगे। यह वही योजना है जिसका श्रेय पूरी तरह राज्य सरकार को मिलना था, लेकिन अब इसकी शुरुआत खुद पीएम मोदी करेंगे और लाभार्थी महिलाओं के खातों में सीधी राशि ट्रांसफर भी उन्हीं के हाथों होगा। करीब 75 लाख महिलाओं को ₹10,000 की राशि ट्रांसफर की जाएगी, जिसकी लागत 7,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सवाल यह है कि जब योजना राज्य सरकार की है, तो फिर लॉन्च का श्रेय केंद्र को क्यों?
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इससे पहले बिहार में भारतीय जनता पार्टी ने ‘चलो जीते हैं’ नामक रथ यात्रा की शुरुआत की, जो पूरे राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्रों को कवर कर रही है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से इस यात्रा की शुरुआत हुई, जहां भाजपा के बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन मंच पर नीतीश कुमार नहीं थे। इस रथ यात्रा के माध्यम से केंद्र की योजनाओं, खासकर प्रधानमंत्री मोदी की गरीबों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करने वाली फिल्में दिखाने की योजना बनाई गई है।

इतना ही नहीं, भाजपा के प्रचार सामग्रियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें प्रमुखता से हैं, लेकिन नीतीश कुमार की तस्वीरों और उनके नाम का उल्लेख काफी सीमित या लगभग न के बराबर है। यह साफ संकेत है कि भाजपा अब नीतीश कुमार को चेहरा नहीं, बल्कि साझीदार भर मान रही है।
जहां एक ओर भाजपा पीएम मोदी को केंद्र में रखकर चुनावी नैरेटिव गढ़ रही है, वहीं जेडीयू इस बदलाव पर अभी तक चुप्पी साधे हुए है। ना कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया, ना कोई विरोध। जबकि अतीत में जेडीयू हमेशा नीतीश कुमार के नाम पर चुनाव प्रचार करती रही है — 2015 में “बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है”, 2020 में “क्यों करें विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार” और इस साल के शुरुआत में ऑफिस के बाहर लगा पोस्टर “25 से 30 फिर से नीतीश” इसी कड़ी का हिस्सा रहे हैं।
अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जेडीयू की योजनाएं, रथ भाजपा का, प्रचार में चेहरा मोदी का — ये सब संकेत दे रहे हैं कि सत्ता का संतुलन धीरे-धीरे भाजपा की तरफ झुक रहा है। नीतीश कुमार भले अभी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हों, लेकिन राजनीतिक स्पेस में उनकी जगह धीरे-धीरे मोदी ले रहे हैं।






















