बिहार की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्य की एनडीए सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार ठोस जवाब देने के बजाय पुराने ‘लालू राज’ का हवाला देकर ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। विधानसभा सत्र के दौरान सत्तापक्ष के कुछ नए सदस्यों द्वारा पूर्ववर्ती शासन पर निशाना साधे जाने को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया।

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कहा कि राज्य में लगभग रोज बेटियों और बहनों की अस्मिता से जुड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं और हर कोने से सवाल उठ रहे हैं, मगर सत्तापक्ष की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सदन में जब विपक्ष सवाल उठाता है तो जवाब के नाम पर घिसे-पिटे संवाद पढ़े जाते हैं या फिर दशकों पुराने आरोपों को दोहराया जाता है, जिनका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। उनका इशारा इस बात की ओर था कि सरकार मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही है।
अपने बयान में रोहिणी आचार्य ने मुजफ्फरपुर की घटना, पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या, तथा दरभंगा में एक मासूम बच्ची के साथ हुई दर्दनाक वारदात का जिक्र किया। उनका कहना था कि ये घटनाएं वर्तमान शासनकाल में हुई हैं और इन पर गंभीर विमर्श की जरूरत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नए विधायकों को पूर्व के शासनकाल से जुड़ी बातें पढ़ने के लिए दी जाती हैं, जबकि वर्तमान में घट रही घटनाओं पर चुप्पी साध ली जाती है। इसी संदर्भ में उन्होंने एक विधायक को ‘लेडी-धृतराष्ट्र’ की संज्ञा देते हुए कहा कि जो सामने दिख रहा है, उस पर आंखें मूंद लेना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से बचना है।






















