Samrat Chaudhary Nitish Kumar: दरभंगा में आयोजित समृद्धि यात्रा कार्यक्रम के दौरान बिहार की राजनीति उस समय अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई, जब उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में ऐसा बयान दे दिया, जिसने मंच के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। उनके भाषण के कुछ अंश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या उनके शब्दों से मुख्यमंत्री असहज हो गए थे।
सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में बिहार के विकास कार्यों को गिनाते हुए कहा कि अब राज्य बदले हुए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने सड़क, बिजली, पानी और परिवहन व्यवस्था का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पहले जहां पटना से दरभंगा पहुंचने में सात घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर ढाई घंटे में पूरा हो जाता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की साझा विकास यात्रा का परिणाम बताया।
लेकिन राजनीतिक तापमान उस वक्त बढ़ा जब सम्राट चौधरी ने रोजगार और पलायन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग अच्छी नौकरी के लिए बाहर जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दिया जाए, लेकिन जो मजदूरी के लिए पलायन करते हैं, उनके लिए बिहार में ही रोजगार सृजन की जिम्मेदारी NDA सरकार उठाएगी। इसी बयान को लेकर सियासी विश्लेषक इसे सीधा संदेश मान रहे हैं कि सरकार अब पलायन की समस्या को चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है।
भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने “जय श्रीराम” का नारा भी लगाया, जो मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा गया। कैमरों में कैद नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं।
इस पूरे घटनाक्रम को नीट छात्रा प्रकरण से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि उसी समय राज्य में कानून-व्यवस्था और न्याय को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। सम्राट चौधरी का विकास और रोजगार पर जोर देना यह संकेत देता है कि NDA सरकार इन मुद्दों को लेकर एक सकारात्मक नैरेटिव गढ़ना चाहती है।
हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या सम्राट चौधरी के बयान से NDA के भीतर कोई असहजता सामने आई है। नीतीश कुमार का मंच पर शांत और गंभीर रहना राजनीतिक संकेतों से भरपूर माना जा रहा है। दरअसल, बिहार की राजनीति में शब्दों का वजन बहुत मायने रखता है और जब मंच साझा हो, तो हर वाक्य अपने भीतर संकेत छिपाए होता है। सम्राट चौधरी का यह भाषण विकास, रोजगार और धार्मिक प्रतीकों के मिश्रण के साथ एक ऐसा संदेश बन गया, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों को नई बहस का मुद्दा दे दिया है।






















