बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में दो दशक बाद ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे राज्य के सत्ता समीकरण को बदल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गृह मंत्रालय वापस लेकर उसे डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को सौंप दिया गया है। इस फेरबदल के बाद विपक्ष ने सख्त प्रतिक्रिया दी है और यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या बिहार अब उत्तर प्रदेश की तरह “बुलडोज़र मॉडल” की राह पर बढ़ने वाला है?
विपक्षी दलों में सबसे तीखी प्रतिक्रिया भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य की तरफ से आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक दिशा बदलने वाला फैसला है, जो आगे चलकर कानून के शासन की जगह ‘बुलडोज़र शासन’ को स्थापित करेगा। उनके अनुसार नीतीश कुमार अब सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री रह गए हैं, जबकि वास्तविक नियंत्रण उन नेताओं के हाथ में चला गया है, जो यूपी के बुलडोज़र मॉडल को आदर्श मानते हैं।
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हाजीपुर में किसान आंदोलन के प्रमुख नेता विशेश्वर प्रसाद यादव की श्रद्धांजलि सभा में भाषण देते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार एक बेहद खतरनाक राजनीतिक दौर में प्रवेश कर रहा है। उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश में जिस तरह बुलडोज़र का इस्तेमाल दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर हुआ, वही पैटर्न अब बिहार में दोहराया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सवर्ण सामंती शक्तियां पहले की तरह ही सत्ता संरक्षण में रहेंगी और पीड़ित सामाजिक वर्गों पर राज्य शक्ति का दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए। भट्टाचार्य ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया के नाम पर ठोस आधार के बिना 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जिनमें करीब 40 लाख नाम पूरी तरह गैर-तर्कसंगत तरीके से मिटाए गए। इसके साथ 20–25 लाख नाम ऐसे जोड़े गए, जिससे बूथवार संतुलन बदल गया और चुनावी निष्पक्षता पर गहरा संदेह पैदा हुआ।
दीपांकर भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले 30 हजार करोड़ रुपये अलग-अलग योजनाओं के नाम पर जनता में बांटे गए, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ना तय था। उनके अनुसार बिहार में चुनाव प्रक्रिया अब मजाक बनकर रह गई है और पूरा लोकतांत्रिक ढांचा संकट में है।
उन्होंने कहा कि किसानों-मजदूरों के अधिकार, महिलाओं की स्वतंत्रता और प्रदेश का लोकतांत्रिक चरित्र खतरे में है। वे दावा करते हैं कि वोट चोरी और सीनाजोरी के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और चुनावों में महिलाओं को भ्रमित कर वोट लेने का तरीका लोकतंत्र के साथ धोखा है।






















