Sanjay Jha statement: बिहार की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल की ओर से खरमास के बाद बिहार में “खेल” होने के दावे पर जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने तीखा और विश्लेषणात्मक जवाब दिया है। संजय झा ने इस बयान को विपक्ष की हताशा और हार की कुंठा बताते हुए कहा कि चुनावी नतीजों के बाद भी विपक्ष सच्चाई स्वीकारने को तैयार नहीं है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।
संजय झा ने कहा कि लोगों को सोचने की जरूरत है कि जिन दलों को जनता ने स्पष्ट रूप से नकार दिया, वे अब किस मानसिक स्थिति में हैं। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव परिणामों से पहले तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने की तारीखें तक घोषित कर चुके थे, मंत्रिमंडल के गठन और उपमुख्यमंत्री पदों की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन नतीजों ने पूरी कहानी बदल दी। संजय झा के अनुसार, बिहार की जनता ने प्रचंड बहुमत देकर नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और यह भरोसा किसी बयान से नहीं डगमगाएगा।
एक ट्वीट और मच गया सियासी घमासान.. कुशवाहा की पार्टी में ‘नीयत बनाम नेतृत्व’ की बहस तेज
उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार सिर्फ संख्या बल के आधार पर नहीं, बल्कि कामकाज और नीतियों के दम पर मजबूत है। केंद्र सरकार का भी बिहार को पूरा सहयोग मिल रहा है, जिसका असर विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं में साफ दिख रहा है। संजय झा का दावा है कि अगले पांच वर्षों में बिहार विकसित प्रदेश की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा और इसका रोडमैप पहले से तैयार है।
रोहिणी आचार्य के फेसबुक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने सुरक्षा के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि बिहार में किसी को असुरक्षित महसूस करने की जरूरत नहीं है। राज्य में कानून-व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर है और हर नागरिक को बराबर सुरक्षा मिलती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बिहार अब पुराने दौर से बाहर निकल चुका है, जहां अधिकार सिर्फ बेटों तक सीमित माने जाते थे। आज लड़कियों को भी उतने ही अधिकार और अवसर मिल रहे हैं, जितने लड़कों को, और यह बदलाव नीतीश कुमार के सामाजिक सुधारों का परिणाम है।
बीस वर्षों में उद्योग, रोजगार और नौकरी न देने के विपक्षी आरोपों पर संजय झा ने कहा कि यह तथ्यहीन और भ्रामक बयान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में न सिर्फ सरकारी नौकरियां दी गईं, बल्कि निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर पैदा हुए। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और निवेश से जुड़े फैसलों ने बिहार की अर्थव्यवस्था को गति दी है। संजय झा ने दो टूक कहा कि एक करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरी देने का जो वादा किया गया है, वह सिर्फ चुनावी नारा नहीं है, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता है और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।






















