कटिहार में इस बार मकर संक्रांति का सामाजिक रंग धीरे-धीरे राजनीतिक रंग में बदलता दिखा, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद तारिक अनवर (Tariq Anwar at BJP) भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी अशोक अग्रवाल के आवास पर आयोजित दही–चूड़ा भोज में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। कार्यक्रम में दही-चूड़ा और तिलगुल की मिठास के साथ बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की सुगबुगाहट भी महसूस हुई। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न समुदायों के लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को सामाजिक सद्भाव का केंद्र बना दिया।
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सांसद तारिक अनवर ने आयोजन को पूरी तरह सामाजिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं बल्कि भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पर्व में राजनीति नहीं बल्कि संस्कृति और सद्भाव की महक होती है। लेकिन जब उनसे मकर संक्रांति के बाद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव पर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब बेहद दिलचस्प था। तारिक अनवर ने मुस्कुराते हुए कहा कि राजनीति में कभी भी नई घटनाएं हो सकती हैं और ‘“’इंतजार कीजिए, कुछ न कुछ तो होगा ही।’
इस छोटे से बयान ने सियासी गलियारों में अटकलों का तापमान बढ़ा दिया है। यह भी दिलचस्प है कि हाल ही में कांग्रेस के दही–चूड़ा भोज में पार्टी के छह विधायक नदारद रहे थे, जिसके बाद अब तारिक अनवर का बीजेपी नेता के भोज में शामिल होना राजनीतिक संकेतों को और मजबूत करता दिख रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी एमएलसी अशोक अग्रवाल और कटिहार की महापौर उषा देवी अग्रवाल द्वारा आयोजित इस भोज ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामाजिक आयोजनों के माध्यम से समुदाय, विचारधारा और दलगत सीमाएं धुंधली हो जाती हैं।






















