विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद से तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) लगातार मीडिया के सवालों से बचते नज़र आ रहे हैं। इसी बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने वरिष्ठ वकील व राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के यूट्यूब चैनल पर एक विशेष इंटरव्यू देते हुए सरकार और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह इंटरव्यू शनिवार को सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने पहली बार हार के कारणों और चुनावी परिदृश्य पर अपनी स्पष्ट राय रखी।
तेजस्वी यादव का कहना है कि बिहार की जनता ने बदलाव के लिए वोट किया था, लेकिन नतीजे जिस तरह आए, उसने हर किसी को चौंका दिया। उन्होंने दावा किया कि यह हार सिर्फ महागठबंधन की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार है। उनके अनुसार, सीटें भले ही घटी हों, लेकिन वोट प्रतिशत बढ़ा है, जिससे यह सिद्ध होता है कि जनता बदलाव चाहती थी।
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तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनावों में सरकारी मशीनरी का जिस पैमाने पर दुरुपयोग हुआ, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने उनकी कई योजनाओं की खुलकर नकल की और आचार संहिता लागू होने से पहले जनता को बड़ी मात्रा में धन का वितरण किया गया। उनके मुताबिक, सिर्फ महिलाओं को ही 10-10 हजार रुपये दिए गए, जबकि किसानों और लाभार्थियों तक हजारों करोड़ रुपये पहुँचाए गए। उनका दावा है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान लगभग 40 हजार करोड़ रुपये बांटे गए, जिसने पूरी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाना भी एक रणनीति थी ताकि ईवीएम की संख्या बढ़े और फिर मशीनों का मनचाहा उपयोग किया जा सके। इंटरव्यू के दौरान तेजस्वी कई बार इस बात पर जोर देते दिखे कि जनता की ओर से ‘दवाई, कमाई, पढ़ाई और सुनवाई’ जैसी बुनियादी जरूरतों की मांग थी, लेकिन चुनाव परिणाम इन भावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करते।
तेजस्वी के बयान से यह स्पष्ट है कि विपक्ष बिहार चुनाव को एक ‘प्रायोजित हार’ के रूप में पेश कर रहा है। उनका दावा है कि एनडीए के प्रति जनाक्रोश था और जनता उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं देखना चाहती थी, लेकिन नतीजों ने कई तरह की शंकाएँ पैदा कर दी हैं।






















