पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने पहली बार सार्वजनिक मंच से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बिहार की राजनीति को नया राजनीतिक संदेश दिया है। पटना स्थित प्रदेश आरजेडी कार्यालय में आयोजित अभिनंदन समारोह में उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है और विचारधारा से समझौता न करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति में आने के शुरुआती दौर से ही उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई के मामले दर्ज किए गए, जिसे उन्होंने राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि वह बीजेपी में शामिल हो जाते तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव की तरह संघर्ष की राजनीति में विश्वास रखते हैं और दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आरजेडी खुद को ‘विचारधारा बनाम सत्ता’ की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
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राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने संगठनात्मक विस्तार को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि उनका लक्ष्य बूथ स्तर तक पार्टी संरचना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आरजेडी केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर में जनाधार बढ़ाकर राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी की भविष्य की रणनीति का संकेत है, जिसमें क्षेत्रीय दल से राष्ट्रीय पहचान बनाने की कोशिश दिख रही है।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनावी माहौल बनते ही विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर फर्जी केस दर्ज किए जाते हैं और उन्हें परेशान किया जाता है। तेजस्वी ने दावा किया कि महागठबंधन से अलग होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई, जिसे उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध बताया। हालांकि सत्तारूढ़ दलों की ओर से इन आरोपों को पहले भी खारिज किया जाता रहा है और एजेंसियों की कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व आगामी चुनावी लड़ाई के लिए संगठन को सक्रिय मोड में लाना चाहता है। तेजस्वी यादव का आक्रामक रुख यह दर्शाता है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं।






















