बिहार की राजनीति में इन दिनों सरकारी आवास को लेकर जबरदस्त घमासान जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi) को भवन निर्माण विभाग द्वारा आवास खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। विभाग ने उन्हें नया आवास आवंटित कर दिया है, लेकिन राजद इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताते हुए एनडीए सरकार पर आक्रामक तेज कर रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की कि राबड़ी देवी किसी भी हालत में आवास खाली नहीं करेंगी, जिससे यह विवाद और तेज हो गया।
इसी बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले ही तय कर चुके हैं कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थायी रूप से सरकारी बंगला रखने का अधिकार नहीं है। उनका कहना था कि राबड़ी देवी को विपक्षी दल की नेता होने के नाते नया आवास मिला है, इसलिए पुराने घर को न छोड़ने की जिद पूरी तरह अनुचित है।
विधायक नहीं तो आवास नहीं.. तेजप्रताप यादव को भी खाली करना होगा सरकारी बंगला
सम्राट चौधरी ने मंगनी लाल मंडल के बयान पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राजद नेतृत्व अराजकता फैलाने की भाषा बोल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नियमों के तहत राबड़ी देवी को उचित आवास दे दिया है, फिर भी आवास नहीं छोड़ेंगे जैसा बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। डिप्टी सीएम का यह बयान स्पष्ट संदेश देता है कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं।
जब उनसे पूछा गया कि यदि राबड़ी देवी आवास खाली नहीं करतीं तो क्या होगा, तो उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय अदालत का होगा और वही तय करेगी कि किसे कहाँ रहना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा दिया गया नया आवास पहले से बड़ा है, इसलिए घर छीनने की बात भ्रामक और राजनीतिक नाटक से ज्यादा कुछ नहीं है।






















