बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव (Bihar Rajya Sabha Election) से पहले राजधानी पटना का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान के सरकारी आवास पर आयोजित दावत-ए-इफ्तार ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। यह महज एक धार्मिक-सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव के अंकगणित को साधने की एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
इस इफ्तार में सीमांचल के प्रभावशाली चेहरों के साथ-साथ जेडीयू और आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने संकेत दे दिया है कि पर्दे के पीछे संवाद का दौर तेज है। बिस्फी से आरजेडी विधायक आसिफ अहमद और जेडीयू के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद अशफाक करीम की मौजूदगी को राजनीतिक विश्लेषक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात मानने को तैयार नहीं हैं। इसे राज्यसभा चुनाव में संभावित समर्थन और नए समीकरणों की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने व्यक्तिगत स्तर पर अख्तरुल ईमान से संपर्क साधने की रणनीति बनाई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने विश्वस्त नेताओं को संवाद की जिम्मेदारी सौंपी है। बिस्फी विधायक आसिफ अहमद का इफ्तार में पहुंचना इसी सियासी मिशन का हिस्सा माना जा रहा है। तेजस्वी यादव की यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्यसभा चुनाव में एक-एक वोट की कीमत बढ़ गई है।
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बिस्फी विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास इस संभावित समीकरण को और रोचक बना देता है। पिछले विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल इस सीट पर AIMIM ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था, जिससे आरजेडी को सीधा लाभ मिला और आसिफ अहमद जीत दर्ज करने में सफल रहे। अब वही ‘अनकहा सहयोग’ राज्यसभा चुनाव में औपचारिक समर्थन में बदले, इसकी कोशिशें तेज होती दिख रही हैं।
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों पर मतदान होना है, जिनमें बिहार की 5 सीटें शामिल हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। वर्तमान विधानसभा संरचना को देखें तो एनडीए चार सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आता है। दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायकों का आंकड़ा है, जो अपने दम पर एक सीट निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में AIMIM का रुख निर्णायक साबित हो सकता है।






















