बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद (Bihar Religious Trust Board) ने 13 दिसंबर 2025 को राजधानी पटना स्थित विद्यापति मार्ग पर अपने कार्यालय में एक अहम बैठक आयोजित कर राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को नई दिशा देने का संकेत दिया। बैठक की अध्यक्षता पर्षद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने की, जिसमें पर्षद के वरिष्ठ और माननीय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इस बैठक को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार के मठों, मंदिरों और धर्मशालाओं को सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक जागरण के केंद्र के रूप में विकसित करने की ठोस पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में सदस्य हरिभूषण ठाकुर ‘बचौल’, आनंद कुमार, महंत विश्वमोहन दास, सायण कुणाल, हिमराज राम, रामबहादुर सिंह और अभिमन्यु कुमार सिंह की उपस्थिति ने विमर्श को व्यापक बनाया। सर्वसम्मति से यह स्पष्ट किया गया कि आने वाले समय में धार्मिक संस्थान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना के मंच बनेंगे। इसी दृष्टिकोण के तहत मंदिरों, मठों और धर्मशालाओं के विकास से जुड़े कई निर्णयों की औपचारिक पुष्टि की गई।
बैठक में तय किया गया कि 25 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को राज्यभर के सभी पंजीकृत मठों और मंदिरों में ‘प्रखरता दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर 1001 हनुमान चालीसा या कबीर वाणी के पाठ के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। पर्षद का मानना है कि अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन और विचार भारतीय लोकतंत्र, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संवेदनशील राजनीति का प्रतीक हैं, जिन्हें धार्मिक स्थलों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। पटना में इस आयोजन को राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में भव्य रूप देने का निर्णय लिया गया है, जिसकी जिम्मेदारी पर्षद सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद कुमार को सौंपी गई है।
भाजपा जब-जब कमजोर होती है.. नेशनल हेराल्ड मामले में राजेश राम ने साधा निशाना
इसके साथ ही 12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद की जयंती को पूरे बिहार में ‘आध्यात्मिक दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। पर्षद का दृष्टिकोण है कि युवाओं को विवेकानंद के विचारों से जोड़ने के लिए मंदिर और मठ सबसे प्रभावी माध्यम हो सकते हैं। राजधानी पटना में यह कार्यक्रम रविंद्र भवन में आयोजित होगा, जहां आध्यात्मिकता, राष्ट्रबोध और युवाशक्ति के विषयों पर विमर्श होने की संभावना है। इस आयोजन के संयोजन की जिम्मेदारी पर्षद सदस्य सायण कुणाल को दी गई है।
वहीं 2 फरवरी 2026 को महान संत और समाज सुधारक रविदास जी की जयंती को पूरे बिहार के मठों और मंदिरों में मनाने का फैसला भी बैठक का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष रहा। संत रविदास की विचारधारा सामाजिक समानता, श्रम की गरिमा और मानवीय मूल्यों पर आधारित रही है, जिसे आज के सामाजिक संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक माना जा रहा है। पटना में इस अवसर पर विद्यापति भवन में मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसकी संयोजक भूमिका पर्षद सदस्य हिमराज राम निभाएंगे।
धार्मिक न्यास पर्षद ने यह भी स्पष्ट किया कि इन सभी कार्यक्रमों की औपचारिक सूचना राज्य के सभी मठों और मंदिरों को भेजी जा रही है, ताकि आयोजन एकरूपता और व्यापक सहभागिता के साथ संपन्न हो सके। जानकारों के अनुसार यह पहल बिहार में धार्मिक संस्थानों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में बड़ा कदम है, जहां आस्था के साथ-साथ विचार, संस्कृति और सामाजिक चेतना को समान महत्व दिया जाएगा।






















