बिहार चुनाव (RJD Bihar Election 2025) में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल के भीतर बड़े पैमाने पर उथल-पुथल जारी है। पार्टी नेतृत्व लालू प्रसाद यादव और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की रणनीति के तहत अब संगठन को साफ-सुथरा और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। तीन दिनों से जारी प्रमंडलवार समीक्षा के दौरान राजद को अब तक करीब 300 ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान मिली है, जिन्होंने चुनावी दौरान पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया। इन भितरघातियों की वजह से कई सीटों पर राजद को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।
पटना स्थित राजद कार्यालय में शुक्रवार को हुई पूर्णिया प्रमंडल की बैठक में भी हार-जीत दोनों तरह के प्रत्याशियों ने विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। इससे पहले मगध और सारण प्रमंडल की समीक्षा बैठकों में भितरघातियों के नामों की लंबी सूची सामने आ चुकी है। तीन दिनों में तीन प्रमंडलों की बैठकों ने पार्टी के भीतर अंतर्कलह और असंतोष की परतें खोलकर रख दी हैं।
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राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल, वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और भोला यादव जैसे नेताओं की मौजूदगी में समीक्षा बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार से शुरू हुआ यह प्रमंडलवार समीक्षा अभियान 4 दिसंबर तक चलेगा। तिरहुत, भागलपुर, पटना समेत अन्य प्रमंडलों से भी प्रत्याशियों से विस्तृत रिपोर्ट ली जाएगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जब तक पूरे चुनावी तंत्र की कमियां सामने नहीं आएंगी, तब तक 2025 की हार से मिली सीख को मजबूत रणनीति में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
इसके बाद 5 से 9 दिसंबर के बीच समीक्षा का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें सभी जिलाध्यक्षों, प्रधान महासचिवों और प्रदेश पदाधिकारियों से भी राय ली जाएगी। इस चरण में उन सभी नामों की जांच होगी जिन्हें उम्मीदवारों ने भितरघाती बताया है। पार्टी ऐसी व्यवस्था भी बना रही है जिसमें जिन पर आरोप हैं, उन्हें स्पष्टीकरण देने का पूरा अवसर मिलेगा। लेकिन यदि कोई संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है तो उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।






















