बिहार सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिस बल की कमी को दूर करने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. गृह विभाग की पहल पर कैबिनेट के फैसले के बाद बिहार स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (Bihar SAP Recruitment) में 17 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है. इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों से रिटायर्ड जवानों को भी सीधे नियुक्ति का मौका मिलेगा, जिससे राज्य की सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
अब तक SAP में केवल सेना से रिटायर हुए जवानों को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखा जाता था, लेकिन नई नीति के तहत अर्धसैनिक बलों के अनुभवी कर्मियों को शामिल करने का फैसला सुरक्षा ढांचे को व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम है. सरकार का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों की तैनाती से अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और विशेष ऑपरेशनों में पुलिस की क्षमता कई गुना बढ़ेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि अर्धसैनिक बलों में काम कर चुके जवानों के पास विविध परिस्थितियों में काम करने का अनुभव होता है, जो राज्य पुलिस के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है.
इस भर्ती योजना को लागू करने के लिए गृह विभाग के उप सचिव ने वित्तीय मंजूरी और बजट आवंटन का प्रस्ताव भेजा है. प्रस्ताव में वेतन वृद्धि भी शामिल है, जिससे रिटायर्ड जवानों को आकर्षित करने और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है. जूनियर कमीशंड ऑफिसर का मानदेय 35 हजार रुपये से बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति माह करने की योजना है, जबकि SAP जवानों का मानदेय 25 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति माह प्रस्तावित किया गया है. इससे सरकार अनुभवी कर्मियों को जोड़ने के साथ-साथ उनकी आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत करना चाहती है.
सरकारी अनुमान के अनुसार, बढ़े हुए वेतनमान के साथ 17 हजार पदों पर भर्ती से राज्य के खजाने पर हर साल लगभग 642 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. इस संरचना में 150 अधिकारी, करीब 16,300 जवान और 550 अन्य पद शामिल होंगे. हालांकि वित्तीय बोझ बढ़ने के बावजूद सरकार इसे सुरक्षा निवेश के रूप में देख रही है, क्योंकि राज्य की लगभग 13 करोड़ आबादी के मुकाबले पुलिस बल की संख्या लंबे समय से कम मानी जाती रही है.
















