बिहार में शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक वर्ष (Bihar Govt Schools Holidays 2025) के लिए सरकारी स्कूलों का अवकाश कैलेंडर जारी कर दिया है, जो छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों—सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग द्वारा जारी इस ताजा कैलेंडर के अनुसार, साल भर में कुल 75 दिन की छुट्टियां तय की गई हैं। अगर इसमें सभी रविवारों को अलग कर दिया जाए तो कुल 65 दिनों का अवकाश बचता है। विभाग का दावा है कि छुट्टियों का यह नया वितरण इस तरह तैयार किया गया है कि शैक्षणिक सत्र पर नकारात्मक असर न पड़े और बच्चों को मानसिक तथा शारीरिक रूप से विश्राम का पर्याप्त समय प्राप्त हो सके।
इस बार गर्मियों की छुट्टियां 20 दिनों की निर्धारित की गई हैं, जो मई और जून के बीच दी जाएंगी। बिहार में इस अवधि में पारा काफी ऊंचाई पर पहुंचता है, ऐसे में यह अवकाश छात्रों को भीषण गर्मी से राहत देने और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का अवसर प्रदान करेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवधि छात्रों के लिए रिवीजन और व्यक्तिगत विकास के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है।
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कैलेंडर में सबसे लंबी छुट्टी दीपावली से लेकर छठ पूजा तक 10 दिनों की रखी गई है। दोनों ही त्यौहार बिहार की संस्कृति और सामाजिक जीवन के केंद्र में हैं, इसलिए यह अवकाश छात्रों को परिवार, रीति-रिवाजों, धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ने का अहम अवसर देता है। इस दौरान आमतौर पर स्कूलों की गतिविधियां पूरी तरह स्थगित रहती हैं और बच्चे उत्सव का पूरा आनंद लेते हैं।
वहीं, शीतकालीन अवकाश 7 दिनों का तय किया गया है, जिसका उद्देश्य सर्दी के मौसम में छात्रों को आराम और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इस अवधि में बच्चे अपनी पाठ्येतर रुचियों जैसे–खेल, संगीत, कला, पढ़ाई या कौशल विकास की ओर समय दे सकते हैं। दुर्गा पूजा पर 5 दिनों और होली पर 2 दिनों की छुट्टी घोषित की गई है। दोनों ही त्यौहार बिहार में सांस्कृतिक उत्साह से मनाए जाते हैं, और यह अवकाश छात्रों को सामाजिक जुड़ाव और पारंपरिक मूल्यों से परिचित कराता है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कहा है कि छुट्टियों के संतुलित वितरण से जहां त्योहारों का उत्साह बरकरार रहेगा, वहीं पढ़ाई और स्कूलों की शैक्षणिक योजनाएं भी प्रभावित नहीं होंगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अकादमिक प्रदर्शन के साथ ही सामाजिक, मानसिक और सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत बनें।
















