Bihar Sonepur Mega Airport: बिहार की विकास यात्रा को नई ऊंचाई देने वाला एक बड़ा दावा सामने आया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा है कि आने वाले दस वर्षों में बिहार दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा एविएशन हब बन सकता है। इस परिवर्तन की धुरी बनेगा सोनपुर में प्रस्तावित विशाल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, जिसे आकार और क्षमता के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनाने की तैयारी बताई जा रही है।
राजीव प्रताप रूडी के मुताबिक सोनपुर में बनने वाला एयरपोर्ट सामान्य परियोजना नहीं, बल्कि एक ‘गेम चेंजर इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ है। प्रस्तावित एयरपोर्ट की लंबाई करीब साढ़े पांच किलोमीटर और चौड़ाई ढाई किलोमीटर बताई जा रही है। इतनी विशाल रनवे क्षमता इसे उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स की श्रेणी में ला सकती है जहां दुनिया के सबसे बड़े वाइड-बॉडी विमान भी आसानी से लैंड और टेक-ऑफ कर सकेंगे। यदि यह परियोजना तय समयसीमा में आगे बढ़ती है, तो बिहार एयर कनेक्टिविटी के नक्शे पर नई पहचान बना सकता है।
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केंद्र सरकार से इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की बात भी सामने आई है। कैबिनेट स्तर पर अनुमति के बाद प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि परियोजना को केवल राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि नीति-स्तर का समर्थन भी प्राप्त है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े पैमाने पर एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने से बिहार पूर्वी भारत के लिए ट्रांजिट हब बन सकता है, जिससे नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी क्षेत्रों के साथ हवाई संपर्क मजबूत होगा।
इस परियोजना का सबसे अहम पहलू जमीन अधिग्रहण है। सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले मालिकों को बाजार मूल्य का पांच गुना मुआवजा दिया जाएगा। यह मॉडल किसानों और स्थानीय जमीन मालिकों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अचानक पूंजी प्रवाह होने से रियल एस्टेट, छोटे व्यवसाय और स्थानीय सेवा क्षेत्र में तेजी आने की संभावना है।
एयरपोर्ट के साथ-साथ कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पटना और सोनपुर को जोड़ने वाले जेपी सेतु के छह लेन विस्तार का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह विस्तार परियोजना पूरी होने पर राजधानी पटना से सोनपुर की दूरी और यात्रा समय दोनों कम होंगे। बेहतर सड़क संपर्क किसी भी बड़े एयरपोर्ट की सफलता की बुनियादी शर्त होती है, और इसी दिशा में राज्य सरकार और केंद्र का फोकस दिख रहा है।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो एक मेगा एयरपोर्ट केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहता। इसके आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, कार्गो टर्मिनल, होटल इंडस्ट्री, वेयरहाउसिंग और एमआरओ (Maintenance, Repair and Overhaul) जैसी गतिविधियां विकसित होती हैं। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियां सृजित होती हैं। बिहार जैसे राज्य के लिए, जहां रोजगार एक प्रमुख मुद्दा रहा है, यह परियोजना गेम चेंजर साबित हो सकती है।
पर्यटन के लिहाज से भी सोनपुर एयरपोर्ट का महत्व बढ़ जाता है। वैशाली, नालंदा और बौद्ध सर्किट जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। यदि एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया गया, तो बिहार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में मजबूत कदम रख सकता है।हालांकि, इतनी बड़ी परियोजना के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता, पुनर्वास नीति और समयबद्ध क्रियान्वयन जैसे मुद्दे इसकी सफलता तय करेंगे।






















