बिहार में पत्थर खनन (Bihar Stone Mining) को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। पांच प्रमुख पत्थर खदानों की खनन समय-सीमा समाप्त होने और पट्टे निरस्त हो जाने के बाद अवैध खनन की आशंका तेजी से गहराने लगी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य के संबंधित जिलों में सतर्कता का स्तर बढ़ा दिया है और खनन अधिकारियों को कड़ी निगरानी के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग का मानना है कि यदि इस चरण पर सख्ती नहीं बरती गई तो बंद खदानें अवैध गतिविधियों का केंद्र बन सकती हैं, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान होगा बल्कि पर्यावरणीय और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां भी खड़ी होंगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कदम केवल औपचारिक चेतावनी तक सीमित नहीं है। एहतियात के तौर पर विशेष उड़नदस्ता टीमें गठित की गई हैं, जिन्हें बंद हो चुकी खदानों की नियमित और औचक जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन टीमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी नियमों को दरकिनार कर पत्थर का अवैध उत्खनन या परिवहन न हो सके। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय बनाकर हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें।
पांच खदानों के पट्टे समाप्त होने के बाद बिहार में फिलहाल केवल तीन पत्थर खदानें ही वैध रूप से संचालित हो रही हैं। इन तीनों खदानों का कुल रकबा लगभग 37.5 एकड़ बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, खनन क्षेत्रों की संख्या में अचानक आई यह कमी बाजार में पत्थर की मांग और आपूर्ति के संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जिसका सीधा असर अवैध खनन की प्रवृत्ति पर पड़ता है। इसी वजह से विभाग पहले से ही संभावित जोखिम को रोकने के लिए सक्रिय हो गया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो गया जिले में एक और शेखपुरा जिले में सात खदानों को पांच वर्षों के लिए खनन की स्वीकृति दी गई थी। गया जिले की इकलौती खदान का पट्टा 15 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है। वहीं शेखपुरा जिले की चार खदानों में से एक का पट्टा 26 नवंबर 2025 को खत्म हुआ, जबकि शेष तीन खदानों के पट्टे दिसंबर 2025 में अलग-अलग तिथियों पर समाप्त हो गए। इन पट्टों की समाप्ति के साथ ही विभाग की चिंता और जिम्मेदारी दोनों बढ़ गई हैं।
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जो तीन खदानें अभी चालू अवस्था में हैं, उनमें से दो खदानों के पट्टे की समय-सीमा 13 जून 2026 तक है, जबकि एक खदान का पट्टा 16 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। विभाग इन खदानों पर भी अतिरिक्त निगरानी रखने की तैयारी में है, ताकि समय-सीमा के करीब आते ही किसी भी तरह की अनियमितता न हो। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के तहत खनन बंद होने के बाद किसी भी प्रकार की गतिविधि सीधे अवैध मानी जाएगी।
खान एवं भूतत्व विभाग ने साफ किया है कि अवैध खनन को लेकर राज्य सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित ठेकेदारों, वाहन मालिकों और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का दावा है कि यह सख्ती न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करेगी, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और राज्य के राजस्व हितों की भी रक्षा करेगी।





















