बिहार के रेल यात्रियों के लिए शनिवार ऐतिहासिक बनने जा रहा है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस (Bihar gets Vande Bharat) के शुरू होते ही न सिर्फ यात्रा की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि रेल सफर की परिभाषा भी बदल जाएगी। हावड़ा से दिल्ली के बीच प्रस्तावित यह हाईटेक ट्रेन पटना से होकर गुजरेगी, जिससे बिहार को सीधे तौर पर आधुनिक रेलवे तकनीक का बड़ा लाभ मिलने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और इसी के साथ बिहार की रातों की यात्रा एक नए युग में प्रवेश करेगी।
अब तक वंदे भारत को केवल चेयरकार के रूप में देखा गया था, लेकिन स्लीपर संस्करण के आगमन से लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा आरामदेह और समय की बचत वाली हो जाएगी। करीब 1500 किलोमीटर का सफर महज 14 घंटे में पूरा करने वाली यह ट्रेन उन यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी, जो दिल्ली, पटना और हावड़ा के बीच अक्सर आवाजाही करते हैं। मोकामा, किऊल, पटना, बक्सर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव के कारण बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को सीधी और तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी।
बिहार के नजरिए से यह ट्रेन केवल एक नई सुविधा नहीं, बल्कि विकास के संकेत के तौर पर देखी जा रही है। राजधानी पटना का दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों से तेज़ रेल संपर्क व्यापार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को नई गति देगा। जानकार मानते हैं कि स्लीपर वंदे भारत के शुरू होने से बिहार की छवि केवल ‘पासिंग स्टेट’ की नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब के रूप में उभरेगी।
16 कोच वाली इस एसी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 823 यात्रियों की क्षमता है। इसमें थर्ड एसी, सेकंड एसी और फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं, जिससे हर वर्ग के यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ सफर का विकल्प मिलेगा। खास बात यह है कि थर्ड एसी में सबसे ज्यादा यात्रियों के लिए व्यवस्था की गई है, जो आम यात्रियों को ध्यान में रखकर की गई योजना को दर्शाता है।
तकनीक के लिहाज से भी यह ट्रेन भारतीय रेलवे के भविष्य की झलक पेश करती है। बेहतर लाइटिंग, स्वच्छ और आधुनिक टॉयलेट, हर बर्थ पर चार्जिंग प्वाइंट, ऑटोमैटिक दरवाजे, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी और उन्नत फायर सेफ्टी सिस्टम जैसी सुविधाएं इसे पारंपरिक ट्रेनों से अलग बनाती हैं। यही वजह है कि रेलवे इसे केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि ‘चलता-फिरता स्मार्ट कोच’ मान रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कार्यक्रम केवल ट्रेन को हरी झंडी दिखाने तक सीमित नहीं है। मालदा से वे सात नई ट्रेनों का शुभारंभ करेंगे और 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की रेल व सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। ऐसे में वंदे भारत स्लीपर की शुरुआत को रेलवे के आधुनिकीकरण और पूर्वी भारत के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।






















