1 दिसंबर से शुरू हो रहे बिहार विधान मंडल के सत्र (Bihar Vidhan Mandal Session) को लेकर प्रशासनिक हलचल अपने चरम पर है। तैयारियों की समीक्षा के लिए आज बिहार विधान सभा के मुख्य भवन स्थित वाचनालय में उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने की। इस बैठक में सुरक्षा, ट्रैफिक, चिकित्सा, सफाई, पार्किंग और टेक्निकल सपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई ताकि सत्र सुचारू रूप से सम्पन्न हो सके।

अवधेश नारायण सिंह ने स्पष्ट किया कि यह सत्र अष्टादश बिहार विधान सभा का प्रथम सत्र होगा, इसलिए प्रत्येक प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील और गरिमामयी होगी। उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर को नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण, 2 दिसंबर को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव, 3 दिसंबर को विस्तारित सेंट्रल हॉल में संयुक्त सत्र में राज्यपाल का अभिभाषण, 4 दिसंबर को धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और सरकार का जवाब तथा 5 दिसंबर को द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर वाद–विवाद होगा। इन पांच दिनों में बिहार की नई सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और आगामी राजनीतिक दिशा का संकेत साफ नजर आएगा।
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बैठक में सभापति ने सभी विभागीय अधिकारियों को विधानसभा सचिवालय के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा और सीसीटीवी मॉनिटरिंग को अपडेट रखने, मेडिकल सहायता को 24×7 सक्रिय करने, पार्किंग और ट्रैफिक सिस्टम को सुव्यवस्थित करने तथा नवनिर्मित विधायक आवासों में जल-विद्युत आपूर्ति और सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आदेश दिया। नगर निगम को स्ट्रीट लाइट और बेसिक सुविधाओं को तत्परता से सुधारने का निर्देश दिया गया।
संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सरकार की ओर से भरोसा दिलाया कि सत्र के सफल संचालन के लिए सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि नई विधानसभा के पहले सत्र के दौरान किसी भी नवनिर्वाचित सदस्य को कोई परेशानी न हो, इसकी विशेष निगरानी की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार, एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह, आईएंडपीआरडी निदेशक वैभव श्रीवास्तव, भवन निर्माण विभाग के संयुक्त सचिव शिव रंजन, डीएम डॉ. त्यागराजन एस एम, एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा, नगर आयुक्त यशपाल मीणा तथा विधान परिषद एवं विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि आगामी सत्र सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि नई सरकार की प्रशासनिक दक्षता का पहला बड़ा परीक्षण रहेगा।






















