बिहार विधान परिषद में बजट (Bihar Budget Session) पर चर्चा के दौरान सियासी माहौल अचानक गर्मा गया, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी ने बहस को राजनीतिक रंग दे दिया। बजट के मुद्दों पर गंभीर चर्चा के बीच नेताओं की टिप्पणियों और तंज ने सदन को कुछ देर के लिए हल्का-फुल्का लेकिन विवादित माहौल में बदल दिया। जदयू नेता दिलीप जायसवाल के बयान ने इस बहस को नया मोड़ दिया, जिसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच शब्दों की तल्खी और बढ़ गई।
चर्चा के दौरान दिलीप जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वे विदेश गए थे यह पता लगाने के लिए कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम किसी वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। जायसवाल ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि इस सत्य की पुष्टि करने में उन्हें एक महीना लग गया, लेकिन विदेश जाकर जांच करने के बाद पता चला कि सचमुच नीतीश कुमार का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है। इस टिप्पणी के बाद सदन में हंसी-ठहाकों के साथ शोरगुल भी बढ़ गया और राजनीतिक माहौल में गर्मी आ गई।
इस बीच वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दकी ने जायसवाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप राबड़ी देवी को बहन मानते हैं, इसलिए व्यक्तिगत टिप्पणी से बचना चाहिए। इस पर दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। इस संवाद के बाद सदन में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बनी रही, जिसे बाद में अन्य सदस्यों के हस्तक्षेप से शांत किया गया।
बजट चर्चा के दौरान जदयू एमएलसी खालिद अनवर ने विपक्ष, खासकर आरजेडी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरजेडी के 15 वर्षों के शासनकाल में बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ा और विकास की गति धीमी रही। खालिद अनवर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली का समर्थन करते हुए कहा कि जनता को उन पर भरोसा है और जब वह किसी योजना या काम का आश्वासन देते हैं, तो लोग मानते हैं कि वह पूरा होगा। उन्होंने विपक्ष के रोजगार से जुड़े वादों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल घोषणाएं करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता।
सत्ता पक्ष के नेताओं ने यह भी दावा किया कि नीतीश कुमार का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल होना बिहार के लिए गर्व की बात है और इसे लेकर सदन में मुख्यमंत्री को बधाई देने का प्रस्ताव लाने की मांग भी उठी। हालांकि विपक्ष ने इन दावों को राजनीतिक प्रचार बताते हुए सरकार से बजट के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने की मांग की।






















