सदन शुरू होते ही बिहार विधान परिषद (Bihar Vidhan Parishad) का माहौल असहज हो गया। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। दभंगा में छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना ने सदन को झकझोर दिया और राजद एमएलसी सुनील सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की। भावनात्मक माहौल में सवाल यह था कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं और सुरक्षा के दावे जमीनी सच्चाई से क्यों टकरा रहे हैं।
हंगामे के बीच पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफा मांगते हुए कहा कि बिहार का शायद ही कोई जिला बचा हो जहां बच्चियां सुरक्षित महसूस कर सकें। विपक्षी बेंचों से ‘नीतीश कुमार हाय-हाय’ के नारे गूंजने लगे। सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और बहस मुद्दे से हटकर सियासी टकराव में तब्दील होती चली गई। यह टकराव केवल एक आपराधिक घटना पर प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और महिला सुरक्षा के वादों की विश्वसनीयता पर सीधी चोट था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सीट से उठे और विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग आज शोर मचा रहे हैं, उन्होंने अपने दौर में क्या किया था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी सरकार ने बच्चियों की पढ़ाई और सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चलाईं और बिहार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। सरकार की उपलब्धियों का हवाला देते हुए उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि शोर-शराबे से सच्चाई नहीं बदलती, काम से बदलती है। सत्ता पक्ष का तर्क यह रहा कि घटनाओं पर कार्रवाई हो रही है और सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।
इसी दौरान मुख्यमंत्री की भाषा और लहजे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। इस बयान पर लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री पर संसदीय मर्यादाओं को बार-बार लांघने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तर्क और तथ्य कमजोर पड़ते हैं, तब भाषा की सीमा टूटती है।

उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी की आदत बन चुकी है ” संसदीय भाषाई मर्यादा लांघने की ” … दर्जनों दफा मुख्यमंत्री जी ने सदन में और सार्वजनिक मंचों पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग, विशेषकर महिलाओं के संदर्भ में , किया है .. जब तर्क और तथ्यों का टोंटा पड़ जाता है , तभी भाषा की सीमा लाँघ कर व्यक्ति अपनी खीज , अपने वैचारिक खोखलेपन का इजहार करता है .. वैसे भी मुख्यमंत्री जी के पिछले कुछ वर्षों के बयानों – वक्तव्यों पर गौर करने से ये स्पष्ट होता है कि वो महिलाओं के प्रति मानसिक – वैचारिक कुंठा से ग्रस्त हैं और उनके द्वारा महिला सम्मान को लेकर कही जाने वालीं बातें महज राजनीतिक व् चुनावी दिखावा हैं ..






















